पंचकूला को कैटल-फ्री बनाने की मुहिम में फंसी एक गाय, महीनों से भटक रहा मालिक
हरियाणा सरकार की पंचकूला को कैटल-फ्री बनाने की मुहिम के तहत नगर निगम द्वारा पकड़ी गई एक गाय को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति सामने आई है। गाय की मालिक महिला बीते कई महीनों से प्रशासनिक दफ्तरों और विभागों के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन अब तक उसे अपनी गाय वापस नहीं मिल सकी है।
सितंबर में पकड़ी गई गाय, निगम ने भेजा मानसा देवी गौशाला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सितंबर माह में नगर निगम ने पंचकूला क्षेत्र से एक गाय को पकड़ा था। इसके बाद निगम द्वारा उक्त गाय को मानसा देवी गौशाला में भेज दिया गया। गाय की मालिक महिला ने प्रशासन से गाय को छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन नगर निगम ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

समाधान शिविर में पहुंचा मामला, डीसी ने दिए गाय छोड़ने के आदेश
गाय न छोड़े जाने से परेशान महिला ने उपायुक्त (डीसी) कार्यालय में आयोजित समाधान शिविर में अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर सुनवाई करते हुए उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को गाय छोड़ने के आदेश दिए।

जुर्माना वसूलने के बाद भी अटका मामला
डीसी के आदेश लेकर महिला नगर निगम कार्यालय पहुंची। यहां निगम ने जुर्माना वसूल कर गाय को छोड़ने के लिए मानसा देवी गौशाला भेजने की बात कही। हालांकि, जब महिला गौशाला पहुंची तो वहां प्रबंधन ने गाय छोड़ने से इनकार कर दिया।

पिंक टैग का हवाला, एनओसी की मांग
गौशाला प्रबंधन का कहना था कि गाय पर पिंक टैग लग चुका है, ऐसे में अब पशुपालन विभाग (एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट) से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लाना अनिवार्य है। इसके बाद ही गाय छोड़ी जा सकती है।
पशुपालन विभाग ने दी मौखिक अनुमति, फिर भी नहीं छूटी गाय
महिला इसके बाद पशुपालन विभाग पहुंची, जहां उसने अपनी गाय को छुड़ाने की गुहार लगाई। विभाग ने स्पष्ट किया कि वे एनओसी जारी नहीं करते, लेकिन विभाग के आंतरिक व्हाट्सएप ग्रुप में संबंधित गौशाला को गाय छोड़ने के निर्देश दे दिए गए।
इसके बावजूद मानसा देवी गौशाला प्रबंधन ने गाय को छोड़ने से फिर इनकार कर दिया।
प्रशासनिक तालमेल की कमी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने नगर निगम, गौशाला और पशुपालन विभाग के बीच आपसी समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। एक ओर सरकार कैटल-फ्री अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर नियमों और प्रक्रियाओं की उलझन में एक पशु मालिक को महीनों तक न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।




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