“अब बातचीत नहीं, जवाब मिलेगा”: काबुल हमले के बाद तालिबान का युद्धकारी रुख, क्षेत्रीय तनाव खतरनाक स्तर पर
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। काबुल में हालिया एयर स्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान की सत्ता में मौजूद तालिबान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दे दिया है कि अब कूटनीतिक रास्ते पीछे छूट चुके हैं और जवाबी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
राजधानी काबुल में हुए हमलों में एक नशा मुक्ति केंद्र समेत कई स्थानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस हमले में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। यह घटना पहले से चल रहे सीमाई तनाव को खुली टकराव की दिशा में धकेलती नजर आ रही है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सख्त बयान देते हुए कहा कि अब “बातचीत और कूटनीति का समय समाप्त हो चुका है।”
उन्होंने संकेत दिया कि अफगानिस्तान अब पाकिस्तान के खिलाफ प्रत्यक्ष जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान दोनों देशों के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंका को और मजबूत करता है। वहीं पाकिस्तान की ओर से इस तरह के नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के आरोपों को पहले ही खारिज किया जा चुका है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है, जिससे हालात और जटिल बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तनाव कोई अचानक उत्पन्न स्थिति नहीं है, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से डूरंड लाइन के आसपास बढ़ती झड़पों और आरोपों का परिणाम है।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगान क्षेत्र में सक्रिय आतंकी ठिकानों को लेकर चिंता जताता रहा है, जबकि अफगान पक्ष इसे अपनी संप्रभुता में दखल मानता है। मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर दोनों पक्षों ने जल्द संयम नहीं बरता, तो यह विवाद सीमित संघर्ष से आगे बढ़कर व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस घटनाक्रम पर टिकी है, क्योंकि दक्षिण एशिया में किसी भी बड़े टकराव का असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है।




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