डेढ़ अरब के फर्जी एफडी घोटाले में बड़ी कार्रवाई, विकास कौशिक गिरफ्तार5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया आरोपीखबरी प्रसाद, पंचकूला
पंचकूला नगर निगम में सामने आए लगभग डेढ़ अरब रुपये के कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले ने पूरे हरियाणा के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। इस बहुचर्चित मामले में जांच एजेंसियों ने सख्त कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सीनियर अकाउंट ऑफिसर और वर्तमान में कालका नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी विकास कौशिक को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस घोटाले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से सख्ती से पूछताछ की जाएगी, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। यह मामला न केवल सरकारी वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की कमजोरी को भी उजागर करता है।
अदालत में पेशी, 5 दिन की रिमांड
जांच एजेंसी ने अदालत से 7 दिन की रिमांड मांगी थी, ताकि आरोपी से गहन पूछताछ कर अन्य संलिप्त लोगों और फर्जी लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके। हालांकि अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 5 दिन की रिमांड मंजूर की।
हिरासत से गिरफ्तारी तक
सूत्रों के अनुसार, विकास कौशिक को गुरुवार को ही हिरासत में ले लिया गया था। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसका मेडिकल परीक्षण पंचकूला सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल में कराया गया। इसके बाद उसे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अपर्णा भारद्वाज की अदालत में पेश किया गया।
जाली मोहरें और दस्तावेज
जांच में सामने आया है कि घोटाले में इस्तेमाल की गई जाली मोहरें आरोपी ने अपने ससुराल, जींद जिले के बडीवरा गांव में छिपा रखी थीं। इनकी बरामदगी के लिए प्रयास जारी हैं। आरोपी मूल रूप से रोहतक जिले के इंद्रगढ़ गांव का निवासी बताया जा रहा है।
कैसे हुआ घोटाला?
प्रारंभिक जांच के मुताबिक यह पूरा घोटाला बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
- मई 2020 में पहला फर्जी बैंक खाता खोला गया
- जून 2022 में दूसरा खाता खोला गया
- फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर और मोहरों का इस्तेमाल किया गया
इन खातों के जरिए नगर निगम की वास्तविक एफडी को प्री-मैच्योर तुड़वाकर रकम फर्जी खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से रकम अन्य खातों में भेज दी जाती थी।
नियुक्ति पर भी सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि एक क्लर्क स्तर का अधिकारी कालका नगर परिषद का कार्यकारी अधिकारी कैसे बना। उसकी नियुक्ति प्रक्रिया और संभावित संरक्षण की जांच की मांग भी तेज हो गई है।
हर ट्रांजेक्शन की होगी जांच
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने स्पष्ट किया है कि मामले में हर बैंक एंट्री और लेन-देन की गहन जांच की जाएगी। आरोपी से बैंक दस्तावेज, निजी डायरी, संपत्ति का विवरण और अन्य साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
राजनीतिक संपर्कों की चर्चा
विकास कौशिक के कथित रूप से उच्च स्तर तक राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्क होने की भी चर्चा है। सोशल मीडिया पर उसकी कई प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों के साथ तस्वीरें सामने आई हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि उसका नाम हरियाणा के पूर्व विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता के करीबी के रूप में सामने आया है। हालांकि इस संबंध में अब तक किसी भी वरिष्ठ नेता की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है और ज्ञानचंद गुप्ता ने भी इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।
कालका के विकास पर असर की आशंका
विकास कौशिक की गिरफ्तारी के बाद कालका नगर परिषद के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों को चिंता है कि विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है और प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है।



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