पंचकूला में स्ट्रॉन्ग रूम का कैमरा बंद होने का मामला बना चर्चा का विषय, चुनावी पारदर्शिता पर उठने लगे सवाल
पंचकूला नगर निगम चुनाव के बाद अब स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर ईवीएम मशीनें रखी गई हैं, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में से कुछ कैमरे बंद पाए गए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। इस मामले ने चुनावी पारदर्शिता, प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ईवीएम मशीनों को प्रशासन द्वारा निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया है। नियमों के अनुसार स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, पुलिस सुरक्षा और प्रशासनिक मॉनिटरिंग अनिवार्य मानी जाती है ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। ऐसे में कैमरों के बंद होने की सूचना ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई उम्मीदवारों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि जहां ईवीएम मशीनें रखी जाती हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही बेहद गंभीर विषय है। यदि कैमरे वास्तव में बंद पाए गए हैं तो यह केवल तकनीकी खराबी का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय भी बनता है।
राजनीतिक हलकों में यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि आखिर कैमरे कब से बंद हैं और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को कब मिली। इसके साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि यदि कैमरे बंद थे तो उस दौरान वैकल्पिक निगरानी की क्या व्यवस्था की गई थी। कई लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को तुरंत सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की अफवाह या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
कुछ उम्मीदवारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है और चुनाव परिणामों से पहले इस प्रकार की खबरें जनता के बीच संदेह की स्थिति पैदा कर सकती हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को तुरंत कैमरों की स्थिति स्पष्ट करते हुए यह बताना चाहिए कि कौन-कौन से कैमरे बंद थे, कितनी देर तक बंद रहे और इस मामले में जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय की गई है।
चुनाव प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का भी मानना है कि स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी केवल औपचारिकता नहीं बल्कि चुनावी विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यही कारण है कि चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से आमतौर पर स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर और अंदर मल्टी लेयर सिक्योरिटी, लगातार सीसीटीवी मॉनिटरिंग और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं।
इस पूरे मामले के बाद विपक्षी दलों और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को स्ट्रॉन्ग रूम की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी से संबंधित पूरी जानकारी दी जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
नगर निगम चुनाव के परिणाम आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और ऐसे में स्ट्रॉन्ग रूम से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधि राजनीतिक दलों की नजर में बनी हुई है। चुनावी माहौल के बीच यह मुद्दा अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और शहर के राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में लगातार इसकी चर्चा हो रही है।
पूरे मामले पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।


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