ऑफर लेटर का बड़ा नंबर देखकर खुश होने से पहले समझिए ‘इन-हैंड सैलरी’ का पूरा गणित
₹25 लाख का पैकेज… लेकिन पहली सैलरी सिर्फ ₹1.45 लाख! IIT ग्रेजुएट ने खोला CTC का ‘रियलिटी चेक’
नौकरी मिलने पर करोड़ों और लाखों के पैकेज की चर्चा अक्सर सुर्खियां बनती है, लेकिन ऑफर लेटर में लिखी गई CTC (Cost to Company) और बैंक खाते में आने वाली वास्तविक सैलरी के बीच का अंतर कई युवाओं के लिए पहली नौकरी में बड़ा झटका साबित होता है। इसी अनुभव को साझा करते हुए IIT रुड़की और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के पूर्व छात्र सिद्धार्थ माहेश्वरी की सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है।
गुरुग्राम स्थित एक स्टार्टअप में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) के रूप में कार्यरत सिद्धार्थ ने बताया कि उनकी पहली नौकरी का वार्षिक पैकेज 25 लाख रुपये था। उन्हें उम्मीद थी कि हर महीने बड़ी राशि खाते में आएगी, लेकिन पहली सैलरी के रूप में केवल करीब 1.45 लाख रुपये ही मिले। शुरुआत में उन्हें लगा कि बैंक से कोई गलती हुई है, लेकिन बाद में समझ आया कि अंतर CTC और इन-हैंड सैलरी के बीच का था।
उन्होंने बताया कि वार्षिक CTC में केवल मासिक वेतन ही शामिल नहीं होता, बल्कि कंपनी का PF योगदान, ग्रेच्युटी, मेडिकल इंश्योरेंस, वेरिएबल पे और अन्य लाभ भी जोड़ दिए जाते हैं। दूसरी ओर, कर्मचारी के वेतन से PF, प्रोफेशनल टैक्स और आयकर (TDS) जैसी अनिवार्य कटौतियां होने के बाद जो राशि बचती है, वही वास्तविक इन-हैंड सैलरी होती है।
सिद्धार्थ ने नौकरी तलाश रहे युवाओं को सलाह दी कि केवल बड़े CTC से प्रभावित होने के बजाय ऑफर स्वीकार करने से पहले कंपनी से “मंथली इन-हैंड सैलरी (टैक्स और सभी कटौतियों के बाद)” की स्पष्ट जानकारी जरूर लें। उनका कहना है कि CTC एक आकर्षक आंकड़ा हो सकता है, लेकिन दैनिक खर्च, बचत और EMI का बोझ वास्तविक इन-हैंड सैलरी ही तय करती है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि नौकरी चुनते समय उम्मीदवारों को CTC के हर घटक को ध्यान से समझना चाहिए, ताकि बाद में वेतन को लेकर किसी तरह की गलतफहमी या निराशा का सामना न करना पड़े।


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