अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक हिम शिवलिंग का आकार तेजी से घटा, तीन दिनों में 56 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में जारी पवित्र अमरनाथ यात्रा के बीच बाबा बर्फानी के प्राकृतिक हिम शिवलिंग के आकार में तेजी से कमी दर्ज की गई है। ताजा तस्वीरों के अनुसार, गुफा में मौजूद हिम शिवलिंग का अधिकांश हिस्सा पिघल चुका है और इसकी ऊंचाई अब लगभग एक फीट के आसपास रह गई है। यात्रा की शुरुआत से पहले जहां हिम शिवलिंग का आकार कई फीट ऊंचा था, वहीं लगातार बढ़ते तापमान और मौसम में बदलाव के कारण यह तेजी से छोटा होता गया।
हालांकि हिम शिवलिंग के आकार में कमी आने के बावजूद अमरनाथ यात्रा पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और श्रद्धालु निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे हैं।
पहले तीन दिनों में रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिनों की अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार देखने को मिल रहा है। यात्रा के पहले तीन दिनों में 56 हजार से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18.6 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।
पिछले वर्ष यात्रा के शुरुआती तीन दिनों में करीब 47,972 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा 56 हजार के पार पहुंच गया है। इससे साफ है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था पहले की तरह मजबूत बनी हुई है।
हिम शिवलिंग का आकार लगातार घटा
यात्रा शुरू होने से पहले मई महीने में जारी तस्वीरों में प्राकृतिक हिम शिवलिंग की ऊंचाई लगभग सात फीट बताई गई थी। 29 जून को पहली पूजा के समय भी इसका आकार पांच फीट से अधिक था। लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह तक मौसम में बढ़ती गर्मी के कारण हिम शिवलिंग तेजी से पिघल गया और अब इसका आकार काफी छोटा रह गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम होता है। इसलिए इसका आकार हर वर्ष मौसम, तापमान और गुफा के अंदर मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
क्यों पिघलता है प्राकृतिक हिम शिवलिंग
अमरनाथ गुफा का हिम शिवलिंग किसी व्यक्ति द्वारा बनाया या तराशा नहीं जाता। यह प्राकृतिक रूप से बनने वाली बर्फ की संरचना होती है। गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें अत्यधिक ठंड में जमकर धीरे-धीरे बर्फ का स्तंभ तैयार करती हैं, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव के हिमलिंग के रूप में पूजते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने, गुफा के अंदर बढ़ती मानवीय गतिविधियों और मौसम में बदलाव के कारण बर्फ पहले की तुलना में तेजी से पिघल रही है। यदि तापमान दोबारा शून्य से नीचे चला जाए या ताजा बर्फबारी हो तो कुछ हद तक बर्फ का पुनर्निर्माण संभव हो सकता है, हालांकि इसकी संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
दो प्रमुख मार्गों से जारी है यात्रा
अमरनाथ यात्रा इस वर्ष भी दो प्रमुख मार्गों से संचालित की जा रही है।
पहला पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 48 किलोमीटर है। यह मार्ग अपेक्षाकृत लंबा जरूर है, लेकिन चढ़ाई धीरे-धीरे होने के कारण इसे अधिक सुविधाजनक माना जाता है।
दूसरा बालटाल मार्ग है, जिसकी लंबाई लगभग 14 किलोमीटर है। यह दूरी कम होने के बावजूद काफी खड़ी और चुनौतीपूर्ण चढ़ाई वाला रास्ता माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोनों मार्गों से पवित्र गुफा तक पहुंच रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय
यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरे मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सेना, अर्धसैनिक बल, जम्मू-कश्मीर पुलिस और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं।
पहलगाम मार्ग पर पर्वतीय बचाव दल (माउंटेन रेस्क्यू टीम) जरूरतमंद श्रद्धालुओं को चिकित्सा सहायता, ऑक्सीजन और अन्य आपात सेवाएं उपलब्ध करा रही है। वहीं बालटाल मार्ग पर पालकी, पोनी और पोर्टर की सुविधा भी यात्रियों के लिए उपलब्ध है।
बिना पंजीकरण वाले यात्रियों के लिए प्रशासन की अपील
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना पंजीकरण यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं से फिलहाल अपनी यात्रा कुछ दिनों के लिए स्थगित करने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार 9 जुलाई तक के सभी पंजीकरण स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल वैध पंजीकरण वाले श्रद्धालुओं को ही यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। बिना पंजीकरण वाले यात्रियों को सुरक्षा जांच चौकियों पर रोका जाएगा और निर्धारित तिथि के बाद ही आगे जाने दिया जाएगा।
क्या हिम शिवलिंग के छोटा होने से यात्रा प्रभावित होगी?
प्रशासन की ओर से अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है कि हिम शिवलिंग के आकार में कमी आने के कारण यात्रा रोकी जाएगी। यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है और श्रद्धालु लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार अमरनाथ यात्रा का महत्व केवल हिम शिवलिंग के आकार पर निर्भर नहीं करता, बल्कि प्राकृतिक रूप से बनने वाले इस पवित्र स्थल के दर्शन और पूजा का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार भी लाखों श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं और यात्रा मार्गों पर सुविधाओं एवं सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाया जा रहा है।



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