माता वैष्णो देवी दरबार में 550 करोड़ की कथित नकली चांदी का मामला, कोर्ट ने पुलिस से मांगे जांच रिकॉर्ड
जम्मू: माता वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे के रूप में जमा की गई चांदी को लेकर सामने आए कथित घोटाले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। करीब 20 टन चांदी की जांच में बड़े पैमाने पर मिलावट मिलने के दावे के बाद जम्मू की अदालत ने क्राइम ब्रांच से मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
मामले की सुनवाई करते हुए जम्मू के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) मुनीश कुमार मन्हास ने जांच अधिकारी को 29 जुलाई को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
20 टन चांदी की जांच में सामने आई मिलावट का दावा
जानकारी के अनुसार, माता वैष्णो देवी मंदिर में वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 20 टन चांदी को जांच और गलाने के लिए सरकारी टकसाल भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि इसमें केवल 5 से 6 प्रतिशत तक ही शुद्ध चांदी पाई गई, जबकि बड़ी मात्रा में अन्य धातुओं की मौजूदगी मिली।
बताया गया कि नमूनों में कैडमियम और लोहे जैसे तत्व पाए गए। बाजार मूल्य के हिसाब से इस चांदी की अनुमानित कीमत करीब 550 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
असली चांदी बदली गई या श्रद्धालु हुए ठगी का शिकार?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में मिलावट कैसे हुई। क्या श्रद्धालुओं को बाहर से नकली चांदी बेचकर ठगा गया, या फिर मंदिर में चढ़ाई गई असली चांदी को किसी स्तर पर बदलकर उसकी जगह मिलावटी धातु रख दी गई?
इन्हीं आशंकाओं को लेकर जम्मू के वकील दीपक शर्मा ने 9 मई को क्राइम ब्रांच के आईजी और आर्थिक अपराध शाखा के एसएसपी को शिकायत दी थी। उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की थी।
शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप
वकील की शिकायत में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, रिकॉर्ड में हेराफेरी, गबन और चढ़ावे में कथित रूप से हानिकारक धातुओं के इस्तेमाल जैसे आरोपों की जांच की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ता का कहना था कि मामले से जुड़े सबूतों को सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर महत्वपूर्ण रिकॉर्ड या अन्य प्रमाण प्रभावित हो सकते हैं।
क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट पर उठे सवाल
मामला अदालत पहुंचने के बाद क्राइम ब्रांच ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को भेज दिया गया है।
हालांकि, शिकायतकर्ता पक्ष ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि केवल शिकायत को एक विभाग से दूसरे विभाग भेज देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जांच के दौरान क्या कदम उठाए गए और सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए क्या व्यवस्था की गई।
कोर्ट ने मांगे सभी दस्तावेज
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जांच अधिकारी को सभी संबंधित रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की है कि कथित रूप से इस्तेमाल किए गए कैडमियम युक्त धातु के स्रोत, उसकी खरीद-बिक्री और पूरी सप्लाई चेन की जांच की जाए।
फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई पुलिस द्वारा पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड और जांच की दिशा पर निर्भर करेगी।



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