घर नहीं, करोड़ों का ‘स्टेटस’ खरीद रहे अमीर! गुरुग्राम में ₹271 करोड़ का पेंटहाउस, अफोर्डेबल होम की बिक्री घटी
भारत के रियल एस्टेट बाजार में अमीरी और अफोर्डेबिलिटी का अंतर अब और साफ दिखाई देने लगा है। एक तरफ 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री कमजोर पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर अल्ट्रा-रिच खरीदार 100 करोड़ रुपये से लेकर 600 करोड़ रुपये तक की कीमत वाले लग्जरी घरों पर बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं।
गुरुग्राम इसका नया केंद्र बनकर उभरा है। उद्यमी मानव सरदाना ने DLF The Dahlias में करीब 271 करोड़ रुपये का पेंटहाउस खरीदा है। इसी प्रोजेक्ट में निवेशक मधुसूदन केला ने करीब 121 करोड़ और बर्कशायर हैथवे के वाइस चेयरमैन अजीत जैन ने करीब 85 करोड़ रुपये का अपार्टमेंट लिया। 2025 में गुरुग्राम में 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले 1,494 घर बिके, जिनकी कुल बिक्री करीब 24,120 करोड़ रुपये रही।
हालांकि, 100 करोड़ रुपये से ऊपर के सौदों में मुंबई की बादशाहत आज भी कायम है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ली में पिछले 24 महीनों के दौरान 40 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले 30 से ज्यादा घरों की बिक्री हुई, जिनकी कुल कीमत 5,500 करोड़ रुपये से अधिक रही। 2025 में USV की चेयरपर्सन लीना गांधी तिवारी द्वारा वर्ली में करीब 639 करोड़ रुपये के दो डुप्लेक्स खरीदने का सौदा भी सुर्खियों में रहा।
20-50 करोड़ वाले घरों की भी धूमनाइट फ्रैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में देश में 20 से 50 करोड़ रुपये कीमत वाले 371 घर बिके, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 181 था। यानी बिक्री में करीब 105% की वृद्धि हुई। इनमें मुंबई की हिस्सेदारी 214 घरों के साथ सबसे ज्यादा रही।
दूसरी ओर, किफायती आवास बाजार दबाव में है। 2026 की पहली छमाही में 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री 15% घटकर 32,063 यूनिट रह गई। 50 लाख से 1 करोड़ रुपये वाले घरों की बिक्री में भी 5% कमी दर्ज हुई। इसके उलट 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी बढ़कर 54% पहुंच गई।
यानी रियल एस्टेट का खेल अब सिर्फ ‘घर खरीदने’ तक सीमित नहीं दिख रहा—ऊंची कीमत वाला लग्जरी सेगमेंट तेजी से चमक रहा है, जबकि आम खरीदार के लिए किफायती घर का सपना और महंगा होता जा रहा है।



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