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फर्जी वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच की मांग पर केंद्र को नोटिस
याचिका में देशभर में बड़ी संख्या में गैर-योग्य लोगों के वकालत करने का दावा
इलाहाबाद में 1,000 से अधिक संदिग्ध वकीलों का मामला उठा
देश में कथित फर्जी वकीलों के बढ़ते नेटवर्क को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गंभीर रुख अपनाया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फर्जी अधिवक्ताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग वकालत कर रहे हैं, जो निर्धारित कानूनी योग्यता और वैध पंजीकरण की शर्तें पूरी नहीं करते।
इलाहाबाद में 1,000 से ज्यादा संदिग्ध वकीलों का दावा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता राजा चौधरी ने इलाहाबाद में 1,000 से अधिक फर्जी वकीलों के होने का दावा किया। हालांकि, कोर्ट के समक्ष इलाहाबाद से जुड़े 105 मामलों का भी उल्लेख हुआ। याचिकाकर्ता के अनुसार समस्या केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी व्यापक जांच की आवश्यकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में ऐसे मामलों पर कार्रवाई शुरू होने के बाद बार काउंसिल की सिफारिश पर 68 वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस स्तर पर करीब 100 मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
हर तीन में से एक वकील फर्जी होने का दावा
याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा के उस कथित बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें बार में 30 से 40 प्रतिशत वकीलों के फर्जी होने की बात कही गई थी। जून 2026 में अधिवक्ताओं प्रशांत कुमार और विपिन नायर की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस आंकड़े और समस्या पर चिंता जताई गई थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ लोग बिना वैध अधिकार के वकील बनकर लोगों से पैसे वसूल रहे हैं। इससे न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी का खतरा बढ़ता है, बल्कि न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता पेशे की विश्वसनीयता पर भी गंभीर असर पड़ता है।
20 लाख से ज्यादा पंजीकृत अधिवक्ता
कानून मंत्रालय ने अगस्त 2023 में राज्यसभा में बताया था कि देश में 20 लाख से अधिक अधिवक्ता पंजीकृत हैं। बार काउंसिल के अनुसार हर साल लगभग 80 हजार नए अधिवक्ता पेशे में प्रवेश करते हैं। कानून की डिग्री के साथ बार काउंसिल की निर्धारित परीक्षा और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करना प्रैक्टिस के लिए जरूरी है।
अधिवक्ताओं की वास्तविक प्रैक्टिस और पंजीकरण की जांच के लिए Certificate and Place of Practice Verification Rules, 2015 लागू हैं। इनके तहत समय-समय पर अधिवक्ताओं की प्रैक्टिस संबंधी जानकारी का सत्यापन किया जाता है। गलत जानकारी मिलने पर संबंधित बार काउंसिल कार्रवाई कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में अब केंद्र के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि देशभर में फर्जी अधिवक्ताओं के नेटवर्क की जांच का दायरा कितना व्यापक होगा और CBI जांच की मांग पर अदालत क्या दिशा तय करती है।




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