अपोलो चेयरमैन ने आनुवंशिक जोखिम की ओर किया इशारा, नियमित स्वास्थ्य जांच पर जोर
युवाओं में हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा, सिर्फ घी-तेल को जिम्मेदार मानना सही नहीं: डॉ. रेड्डी
देश में कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के चेयरमैन डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने दक्षिण एशियाई आबादी में हृदय रोगों के अपेक्षाकृत अधिक जोखिम को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि युवाओं में हार्ट अटैक को केवल खान-पान या घी-तेल के सेवन से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं है।
डॉ. रेड्डी के अनुसार, दक्षिण एशियाई लोगों में हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा आनुवंशिक और जैविक कारणों से भी जुड़ा हो सकता है। उन्होंने एक ऐतिहासिक परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों पहले पड़े अकाल और उस दौर की परिस्थितियों का प्रभाव कई पीढ़ियों तक शरीर की संरचना और मेटाबॉलिज्म पर पड़ सकता है। हालांकि, ऐसे दावों को समझने के लिए वैज्ञानिक शोध और व्यापक प्रमाण जरूरी हैं।
उन्होंने बताया कि देश में अपने लंबे चिकित्सकीय अनुभव के दौरान उन्होंने कम उम्र में हृदय संबंधी समस्याओं से जूझते कई मरीज देखे हैं। पहले युवाओं में हार्ट अटैक के लिए कम शारीरिक गतिविधि और कुछ खाद्य पदार्थों को प्रमुख कारण माना जाता था, लेकिन अब हृदय रोग के जोखिम को आनुवंशिकता, जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य कारकों के संयुक्त प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
युवाओं को लक्षणों और जोखिम को नजरअंदाज न करने की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार में हृदय रोग का इतिहास, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारक कम उम्र में भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। ऐसे में युवाओं के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और सक्रिय जीवनशैली महत्वपूर्ण है।
डॉ. रेड्डी ने युवाओं से संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और समय-समय पर आवश्यक स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की। उनका संदेश साफ है कि हार्ट अटैक को उम्रदराज लोगों की बीमारी मानकर नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।



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