गरीबों के लिए आधार जरूरी, अफसरों की स्वास्थ्य योजना में ‘छूट’ क्यों? CGHS लिंकिंग पर उठे दोहरे मापदंड के सवाल
सरकारी योजनाओं और सेवाओं में आधार आधारित पहचान को पारदर्शिता और फर्जी लाभार्थियों पर रोक का अहम माध्यम बताया जाता है। लेकिन केंद्र सरकार की Central Government Health Scheme (CGHS) में आधार लिंकिंग को लेकर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के विरोध ने इसी व्यवस्था के दोहरे इस्तेमाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ हजारों सरकारी योजनाओं और सेवाओं में आधार का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं CGHS लाभार्थियों के लिए इसे अनिवार्य करने की कोशिशें विरोध के चलते बार-बार टलती रही हैं।
CGHS का लाभ केंद्र सरकार के मौजूदा व सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के अलावा मौजूदा व पूर्व सांसदों, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वर्तमान एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीशों तथा दिल्ली में मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मिलता है। सरकार का तर्क रहा है कि आधार आधारित पहचान से लाभार्थियों की सही पहचान, डुप्लीकेट रिकॉर्ड हटाने और सरकारी सुविधाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलती है।
2015 से प्रयास, 2024 में फिर टला फैसला
CGHS में आधार लिंकिंग को अनिवार्य बनाने के लिए जून 2015 से कई बार निर्देश जारी किए गए, लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद इन्हें वापस लेना पड़ा। जुलाई 2024 में CGHS लाभार्थी ID को आधार से बनी ABHA ID से जोड़ने संबंधी निर्देश को भी सरकार ने ‘अगले आदेश तक’ स्थगित कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों के लिए आधार लिंकिंग स्वैच्छिक बनी हुई है।
विवाद का एक अहम पहलू यह है कि सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं में कम आय वाले लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण जरूरी है। आलोचकों का तर्क है कि जब सार्वजनिक धन से चलने वाली योजनाओं में पहचान सत्यापन को जरूरी माना जाता है, तो CGHS जैसी योजना में अलग मानक क्यों अपनाया जाए।
90% खर्च सरकारी खजाने से
CGHS लाभार्थियों की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि यह एक अंशदायी स्वास्थ्य योजना है, DBT योजना नहीं। हालांकि योजना के कुल खर्च का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा भारत की संचित निधि से आता है। ऐसे में आधार लिंकिंग को लेकर सरकारी कर्मचारियों को मिली छूट पर सवाल उठ रहे हैं।
इसके अलावा CGHS में मृत लाभार्थियों या ऐसे आश्रितों की पहचान के लिए नियमित वार्षिक सत्यापन की व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आती रही है। 2005 में CGHS के कंप्यूटरीकरण के दौरान बनाए गए कई पेंशनर कार्ड बिना नियमित सत्यापन के सक्रिय रहने से फर्जी इस्तेमाल और दुरुपयोग का जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है।
ECHS और रेलवे स्वास्थ्य योजना में आधार जरूरी
पूर्व सैनिकों की ECHS और रेलवे स्वास्थ्य योजना में आधार लिंकिंग को अनिवार्य किए जाने के बीच CGHS में इसे स्वैच्छिक रखने से तुलना भी तेज हो गई है। ऐसे में मूल सवाल सिर्फ आधार लिंकिंग का नहीं, बल्कि सरकारी सुविधाओं के लिए समान पहचान और सत्यापन नियम लागू करने का बनता है। CGHS में आधार व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला अब भी सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति पर निर्भर है।




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