खरी-अखरी: आगाज जब ऐसा है तो अंजाम कैसा होगा
राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति (राज्यसभा का सभापति), लोकसभा स्पीकर और प्रधानमंत्री देश का होता है न कि किसी पार्टी विशेष का। मगर जब ये पार्टी विशेष के होकर काम करते हैं तो उसे संविधान की हत्या के तौर पर देखा जाना चाहिए। ऐसे ही कुछ हालात विगत 11 बरसों से देश में दिखाई दे रहे हैं। […]
