युद्ध की विभीषिका: हारती मानवता और सिसकता विश्व
\युद्ध वास्तव में केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि उसका सबसे गहरा घाव मानवता की आत्मा पर लगता है। कहना गलत नहीं होगा कि आज का विश्व एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ प्रगति की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन धरातल पर विनाश की पदचाप साफ़ सुनाई देती है। पिछले कुछ समय से […]

