साहित्य और सत्ता : चोली दामन का साथ
आदर्श स्थिति यही है कि साहित्य को राजनीति से दूर रखना चाहिए। किन्तु यह बात सुनने में जितनी सहज लगती है, व्यवहार में उतनी ही कठिन है। साहित्य का उद्देश्य ही समाज की बात करना है, पर जैसे ही साहित्य समाज का प्रतिबिंब बनता है ,वह राजनीति से अनजाने में ही जुड़ जाता है, क्योंकि […]
