मकर संक्रांति के बहाने दावेदार आयोजित कर रहे कार्यक्रम
निकाय चुनाव से पहले ही भाजपा में टिकट की होड़, दावेदारों की लंबी कतार से बढ़ी नेतृत्व की चिंता
हरियाणा में पंचकूला, अंबाला और सोनीपत के आगामी निकाय चुनावों को लेकर औपचारिक घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। मेयर चुनाव के लिए आरक्षण ड्रॉ की तिथि 22 जनवरी तय होने के बाद यह संकेत जरूर मिल गया है कि निकाय चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं। राजनीतिक गलियारों में आकलन फरवरी से लेकर मई-जून तक के बीच चुनाव होने को लेकर लगाए जा रहे हैं।
चुनाव की तारीख तय न होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर दावेदारों की सक्रियता चरम पर है। खास तौर पर भाजपा में टिकट के लिए सबसे ज्यादा उत्साह और भीड़ देखने को मिल रही है। पार्टी कार्यालयों के आसपास रोजाना संभावित उम्मीदवारों की मौजूदगी आम हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, संभावित चुनावी क्षेत्रों में कई वार्डों में भाजपा से 5 से 7 दावेदार सामने आ चुके हैं, जबकि कुछ वार्डों में यह संख्या दहाई का आंकड़ा भी पार कर चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में दावेदारों के सामने आने से पार्टी के जिला स्तरीय शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। अंदरखाने की जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ नेताओं के पास रोजाना दर्जनों फोन कॉल आ रहे हैं, जिनमें टिकट को लेकर दावेदारी जताई जा रही है। चूंकि चुनाव की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, ऐसे में नेताओं को फिलहाल सभी को यही आश्वासन देना पड़ रहा है कि वे जनता के बीच सक्रिय रहें और समय आने पर टिकट पर विचार किया जाएगा।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में भी निकाय चुनाव को लेकर हलचल जरूर है, लेकिन भाजपा जैसी भगदड़ की स्थिति नहीं है। कांग्रेस के अधिकांश वार्डों में 2 से 3 दावेदार सामने आए हैं, हालांकि कुछ चुनिंदा वार्ड ऐसे भी हैं जहां 4 से 5 नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। यहां भी फिलहाल नेताओं को आश्वासन के सहारे ही संतोष करना पड़ रहा है।
अन्य राजनीतिक दलों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। जननायक जनता पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल और आम आदमी पार्टी अब तक यह तय नहीं कर पाई हैं कि वे निकाय चुनाव अपने पार्टी सिंबल पर लड़ेंगी या फिर निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देंगी।
आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर खास सतर्कता बरत रही है, क्योंकि हरियाणा के निकाय चुनाव का सीधा राजनीतिक संदेश पड़ोसी राज्य पंजाब तक जाना तय माना जा रहा है, जहां 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पहले से ही बननी शुरू हो चुकी है।
इस बीच संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी माहौल बनाने के लिए सामाजिक और धार्मिक आयोजनों का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है। मकर संक्रांति जैसे त्योहारों को लेकर कई वार्डों में कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं, जिनमें स्थानीय जनता के साथ-साथ मीडिया को खास तौर पर आमंत्रित किया जा रहा है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ये गतिविधियां भले ही सामाजिक दिखें, लेकिन इनके जरिए नेताओं ने अपनी मौजूदगी और दावेदारी दोनों को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है।





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