हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अजीत पवार के निधन के बाद हरियाणा सरकार अलर्ट पर , राज्य के विमान-हेलिकॉप्टरों के अपग्रेडेशन की तैयारी
हरियाणा सरकार अलर्ट पर , राज्य के विमान-हेलिकॉप्टरों के अपग्रेडेशन की तैयारी
महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन की घटना के बाद देशभर में सरकारी विमानन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने भी अपने विमान और हेलिकॉप्टर बेड़े की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। राज्य सरकार अपने विमानों और हेलिकॉप्टरों के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को अपग्रेड कराने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
हरियाणा सिविल एविएशन विभाग ने इस संबंध में एक टेंडर जारी किया है, जिसके तहत सरकारी विमानों और हेलिकॉप्टरों के लिए नवीनतम तकनीकी और सुरक्षा मैनुअल तैयार किए जाएंगे। सरकार ऐसी अनुभवी कंपनियों से प्रस्ताव मांग रही है, जिन्होंने पहले भारत में एयर ऑपरेटरों को सेवाएं दी हों और जिनके पास नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) व नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से मैनुअल स्वीकृत कराने का अनुभव हो। इच्छुक कंपनियां 9 फरवरी तक आवेदन कर सकती हैं, जबकि टेंडर 10 फरवरी को खोले जाएंगे।
सरकार का यह कदम पूर्व में हुए हादसों के अनुभव से भी जुड़ा है। 31 मार्च 2005 को हरियाणा के तत्कालीन मंत्री ओपी जिंदल और सुरेंद्र सिंह का सहारनपुर के पास हेलिकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया था। हालांकि वह हेलिकॉप्टर निजी था, लेकिन इस घटना ने राज्य को विमानन सुरक्षा के प्रति हमेशा सतर्क रहने का सबक दिया।
सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रमुख तैयारियां : आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की योजना
महाराष्ट्र हादसे की शुरुआती जांच में खराब दृश्यता और तकनीकी समन्वय की कमी जैसे कारण सामने आने के बाद हरियाणा सरकार अब अपने विमानों (VT-HRY, VT-HYR और VT-HCA) में परफॉर्मेंस बेस्ड नेविगेशन जैसी आधुनिक तकनीक लगाने की तैयारी कर रही है। इससे खराब मौसम और कम विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकेगी।
पुराने नियमों और मैनुअल में व्यापक बदलाव
सरकारी विमानों से जुड़े कई ऑपरेशन और सेफ्टी मैनुअल समय के साथ पुराने हो जाते हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने DGCA और BCAS के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुरूप ऑपरेशन मैनुअल, फ्लाइट सेफ्टी मैनुअल और सिक्योरिटी मैनुअल को पूरी तरह अपडेट करने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञ एजेंसियों की निगरानी में रखरखाव
टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ऐसी विशेषज्ञ एजेंसियों को जिम्मेदारी दी जाएगी जो न सिर्फ दस्तावेज तैयार करेंगी, बल्कि विमान और हेलिकॉप्टरों के हर तकनीकी और सुरक्षा पहलू की अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जांच भी सुनिश्चित करेंगी। इसके तहत सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि संभावित जोखिमों की पहचान पहले ही की जा सके।
राज्य सरकार का मानना है कि इन कदमों से न केवल वीआईपी उड़ानों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि सरकारी विमानन व्यवस्था को भी भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाया जा सकेगा।





Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!