बिल्डर की मनमानी उजागर करने पर पत्रकारिता पर हमला
जब डर और धमकी से सच न दब सका तो बिल्डर ने उठाया कानूनी हथियार
चंडीगढ़ रीतेश माहेश्वरी
सच्चाई सामने लाने वाली पत्रकारिता एक बार फिर बिल्डरों की दबंगई के निशाने पर है। जीरकपुर के पीर मुसल्ला में पिछले 15 साल से अधर में लटके एक हाउसिंग प्रोजेक्ट पर लगातार खुलासे करने के बाद खबरी प्रशाद अखबार और डिजिटल चैनल एचबीसी न्यूज़ दोनों की टीम को अब बिल्डर की तरफ से 25 पन्नों का लीगल नोटिस भेजा गया है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर प्रकाशित खबरों के लिए 18 पन्नों का अलग से नोटिस शुक्रवार शाम भेजा गया।
सच दबाने की कोशिश
बिल्डर ने पहले खबर रोकने के लिए डराने-धमकाने का अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया। जब यह कारगर नहीं हुआ तो अब कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया गया। नोटिस में मीडिया संस्थान से जवाब तलब किया गया है और खबरें बंद करने की अप्रत्यक्ष चेतावनी दी गई है।


प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल
यह विवादित प्रोजेक्ट 2010 में जीवन गर्ग नाम के एक बिल्डर ने शुरू किया था। प्रोजेक्ट को बनाने के लिए प्रशासन से केवल छह मंज़िल की अनुमति ली गई, लेकिन मौके पर आठ मंज़िलें खड़ी कर दी गईं। और तो और बेसमेंट पार्किंग के लिए अप्रूवल थी वह कहीं बनाई नहीं गई । प्रोजेक्ट के अंदर रोजमर्रा का समान खरीदारी करने के लिए चार दुकान थी जिन्हें प्रोजेक्ट के अंदर रखा जाना था पर उन दुकानों को मेंन सड़क पर ले आया गया जिसकी परमिशन ही नहीं ली गई । और तो और सबसे बड़ी बात की इस प्रोजेक्ट में अब नई कंपनी आ गई है । फ्लैट वह बचेगा क्योंकि पुराने बिल्डर दिवालिया घोषित हो चुके हैं ।
जिन खरीदारों ने लोन लेकर फ्लैट बुक किए थे, वे आज तक घर से वंचित हैं।
15 साल से धक्के खा रहे पुराने अलाटी
गर्ग के दिवालिया होने के बाद बैंक ने पूरा प्रोजेक्ट कब्ज़े में ले लिया।
जीवन गर्ग जानबूझकर दिवालिया हुए , क्योंकि प्रोजेक्ट पर सामान सप्लाई करने वाले मांग रहे थे पैसा क्योंकि यहां का पैसा लगा दिया दूसरे प्रोजेक्ट में । और जिनको फ्लैट बेचे थे वह मांग रहे थे फ्लैट
बाद में यह प्रोजेक्ट एक नई बिल्डर कंपनी गर्ग रियलिटी इंफ्रा प्रमोटर को बेच दिया गया । करोड़ों रुपए की बिल्डिंग का सौदा बहुत ही कम कीमत में अंदर खाने निपटा दिया गया
नई कंपनी पर भी सवाल
नए बिल्डर गर्ग रियलिटी इंफ्रा प्रमोटर के कर्ताधर्ता रॉबिन मंगला ने 2020 से फ्लैट बेचना शुरू किया, जबकि नोटिस में खुद यह स्वीकार किया गया है कि उनका सेल एग्रीमेंट 2022 में हुआ। यह विरोधाभास ही इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है। वही बिल्डर का यह भी कहना है कि 2020 का जो लेटर है वह गलती से प्रिंट हो गया था जबकि हमने 2021 में फ्लैट बेचे थे । तो कहीं ना कहीं बिल्डर खुद ही अपने सवालों में घिर चुका है ।
रॉबिन मंगला क्यों भाग रहे हैं कैमरे का सामना करने से ?
पिछले एक हफ्ते से रॉबिन मंगला से उनका अपना पक्ष कैमरे के सामने रखने के लिए समय मांगा जा रहा पर उन्होंने व्हाट्सएप पर लिखकर जानकारी भेजी कैमरे पर वह आना ही नहीं चाहते । यह स्थिति पूरे मामले को और भी संदिग्ध बनती है ।
पत्रकारिता पर हमला या सच का सामना?
खबरी प्रशाद अखबार और HBC NEWS केवल तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर खबरें प्रकाशित करता है। बिल्डर को यदि कोई आपत्ति है तो अदालत उसका निर्णय करेगी, लेकिन समाचार संस्था सच दिखाने से पीछे नहीं हटेगी।
अखबार ने साफ किया है –
“हमारा काम जनता तक हक़ीक़त पहुँचाना है, न कि बिल्डरों के दबाव में झुकना।”
बड़ा सवाल
क्या बिल्डर सच में पारदर्शिता से काम कर रहा है?
खरीदारों के हक़ में न्याय कब तक टलेगा?
क्या यह कानूनी नोटिस सच को दबाने की रणनीति है?
इस विवाद ने न सिर्फ जीरकपुर के हजारों फ्लैट खरीदारों की उम्मीदों को हिला दिया है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में अब भी स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए कानूनी हथकंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है?
खबरी प्रशाद अखबार और एचबीसी न्यूज कि निवेशकों से अपील
खबरी प्रशाद अखबार और एचबीसी न्यूज लगातार जीरकपुर के बिल्डरों के प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले लोगों से और अपने लिए एक आशियाना ढूंढ रहे लोगों से अपील कर रहा है कि किसी भी प्रोजेक्ट के बारे में अपना पैसा निवेश करने के पहले प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी जरूर करें और अगर आप हमारे ऐसे किसी प्रकार की मदद चाहते हैं तो नीचे दी गई मेल आईडी पर अपनी संपूर्ण जानकारी जिस प्रोजेक्ट के बारे में आप जानकारी चाहते हैं वह जरूर भेजें । हमारी टीम अपनी तरफ से जल्दी से जल्दी आपको सही जानकारी उपलब्ध कराएगी ।
हमें जानकारी इस मेल आईडी परभेजें
hbcnews@gmail.com


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