बाघ को लगाए जाएंगे नकली दांत , महाराष्ट्र में होगी यह अनोखी सर्जरी
नागपुर में रचेगा वन्यजीव चिकित्सा का इतिहास: बाघ के लिए डेंटल इम्प्लांट, इजरायल की विशेषज्ञ टीम करेगी सर्जरी
नागपुर एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक चिकित्सा के संगम का गवाह बनने जा रहा है। महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा स्थित वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (WRTC) में पहली बार किसी बाघ पर डेंटल इम्प्लांट सर्जरी की तैयारी पूरी कर ली गई है। करीब 6 साल के इस बाघ के टूटे हुए दांत की जगह कृत्रिम दांत लगाया जाएगा। यह दुर्लभ सर्जरी इजरायल से आई विशेषज्ञ डेंटिस्ट टीम द्वारा भारतीय पशु चिकित्सकों के सहयोग से की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संभव हुई अनूठी पहल
इस सर्जरी का नेतृत्व इजरायल के प्रसिद्ध डेंटल विशेषज्ञ डॉ. यानिव मेयर और डॉ. एयाल मिलमैन करेंगे। हाल ही में नागपुर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दौरान इस प्रस्ताव पर सहमति बनी, जिसके बाद इसे तुरंत अमल में लाने का निर्णय लिया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मामला केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में एक मिसाल बनेगा।
कैसे घायल हुआ था बाघ !
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले यह बाघ जंगल से भटककर नागपुर के पास खापा गांव तक पहुंच गया था। वापस जंगल में लौटने के प्रयास में वह एक खेत में बने कुएं में गिर पड़ा। रेस्क्यू के दौरान ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) की टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन जांच में सामने आया कि उसका एक प्रमुख दांत बुरी तरह टूट चुका है। दांत क्षतिग्रस्त होने के कारण बाघ के लिए शिकार करना लगभग असंभव हो गया था।
जंगल में वापसी से पहले सर्जरी क्यों है जरूरी ?
वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों का मानना है कि बिना दांत के बाघ को न तो जंगल में छोड़ा जा सकता है और न ही दीर्घकालिक संरक्षण केंद्र में रखना सुरक्षित है। शिकार करने में असमर्थ बाघ जंगल में जीवित नहीं रह पाएगा। इसी कारण डेंटल इम्प्लांट को अनिवार्य माना गया है। सर्जरी के बाद बाघ के व्यवहार और स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जाएगी, जिसके आधार पर उसे जंगल में पुनर्वासित करने का अंतिम फैसला लिया जाएगा।
खर्च इजरायल की टीम उठाएगी
TTC और WRTC की आधुनिक सुविधाओं से प्रभावित होकर इजरायली डॉक्टरों ने सर्जरी का पूरा खर्च स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है। सर्जरी के दौरान भारतीय पशु चिकित्सकों की अनुभवी टीम भी मौजूद रहेगी, ताकि भविष्य में ऐसी तकनीकें देश में ही विकसित की जा सकें।
नागपुर का पुराना अनुभव
यह पहला मौका नहीं है जब नागपुर वन्यजीव चिकित्सा में सुर्खियों में आया हो। वर्ष 2019 में एक बाघ को नकली पैर लगाया गया था, जो शिकारियों के जाल में फंसकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसी तरह कर्नाटक में एक भालू को कृत्रिम टांग लगाकर बचाने का प्रयास किया गया था। हालांकि हर मामला सफल नहीं रहा, लेकिन इन प्रयासों ने भारत में वन्यजीवों के लिए उन्नत चिकित्सा की नई राह जरूर खोली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह डेंटल इम्प्लांट सर्जरी सफल रहती है, तो भविष्य में घायल वन्यजीवों के इलाज के लिए यह एक नई दिशा साबित हो सकती है और संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।





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