वार्ड नंबर 5 और 13 में टिकट को लेकर घमासान, उम्मीदवारों की भीड़ से भाजपा असमंजस में
पंचकूला नगर निगम चुनाव 2026 से पहले दो अहम वार्ड बने ‘हॉट सीट’, सूची जारी होने में हो सकती है देरी
आगामी 2026 नगर निगम चुनाव से पहले पंचकूला के वार्ड नंबर 5 और वार्ड नंबर 13 भाजपा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण सीटों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। दोनों ही वार्डों में बड़ी संख्या में दावेदारों के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प और जटिल होता जा रहा है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि इन वार्डों में उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करने में देरी हो सकती है, क्योंकि सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा।
वार्ड नंबर 5: वर्तमान पार्षद के सामने आंतरिक चुनौती
वार्ड नंबर 5 में पार्षद पद के लिए 9 से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। यहां पहले दिन से ही टिकट को लेकर खींचतान देखने को मिल रही है। वर्तमान पार्षद जय कौशिक एक बार फिर अपनी दावेदारी मजबूत तरीके से पेश कर रहे हैं और अपने कार्यकाल के आधार पर टिकट की उम्मीद जता रहे हैं।
हालांकि, पार्टी के भीतर से ही उन्हें चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के एक प्रभावशाली नेता पर्दे के पीछे से उनके खिलाफ रणनीति तैयार कर रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि इस वार्ड में मुकाबला केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर भी कड़ा रहने वाला है। कार्यकर्ताओं के बीच गुटबाजी की स्थिति भी बनती नजर आ रही है, जो टिकट वितरण को और जटिल बना सकती है।
वार्ड नंबर 13: दावेदारों की लंबी कतार, बढ़ी नेतृत्व की मुश्किलें
वहीं, वार्ड नंबर 13 की स्थिति भी कम पेचीदा नहीं है। इस वार्ड से 10 से अधिक उम्मीदवार पार्षद पद के लिए अपनी दावेदारी जता चुके हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि टिकट केवल एक को ही मिलना है, जबकि बाकी दावेदारों के असंतोष का जोखिम पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस वार्ड के कई उम्मीदवार सीधे भाजपा अध्यक्ष अजय मित्तल से संपर्क में हैं और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे नेतृत्व के सामने यह चुनौती खड़ी हो गई है कि वह किसे प्राथमिकता दें और किसे नजरअंदाज करें।

करोड़पति उम्मीदवारों की बढ़ी संख्या
वार्ड नंबर 13 की एक और खास बात यह है कि यहां आर्थिक रूप से संपन्न, यानी करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या अन्य वार्डों की तुलना में अधिक बताई जा रही है। हालांकि अन्य वार्डों में भी संपन्न उम्मीदवार हैं, लेकिन इस वार्ड में उनकी संख्या और सक्रियता विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई है। सभी उम्मीदवार इस बार पार्षद बनकर सामाजिक सेवा करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे प्रतिष्ठा और प्रभाव की लड़ाई के रूप में भी देख रहे हैं।
बाहरी उम्मीदवारों पर उठे सवाल
इस वार्ड में कुछ ऐसे दावेदार भी चर्चा में हैं, जिन्हें ‘बाहरी उम्मीदवार’ बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ कमजोर मानी जा रही है। यहां तक कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के साथ उनके संबंध भी अच्छे नहीं बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन उम्मीदवारों का स्थानीय वोट बैंक भी सीमित है और पहचान का अभाव है।
इसके बावजूद, उच्च स्तर पर संपर्क होने के कारण ये उम्मीदवार भी मैदान में मजबूती से डटे हुए हैं, जिससे मुकाबला और अधिक रोचक बन गया है।
टिकट वितरण बना बड़ी चुनौती
दोनों वार्डों में दावेदारों की भीड़ और आंतरिक प्रतिस्पर्धा ने भाजपा नेतृत्व के लिए टिकट वितरण को बड़ी चुनौती बना दिया है। पार्टी इस बात को लेकर भी सतर्क है कि किसी भी निर्णय से कार्यकर्ताओं में असंतोष न फैले, क्योंकि इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व कब और किस रणनीति के तहत इन वार्डों के उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करता है। फिलहाल, वार्ड नंबर 5 और 13 पंचकूला नगर निगम चुनाव के सबसे ‘हॉट’ और चर्चित वार्ड बन चुके हैं।




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