सुबह की ड्यूटी से बढ़ा तनाव? नगर निगम कर्मचारियों की घरेलू जिंदगी पर असर, तलाक तक की आशंका
नगर निगम में चल रहे स्वच्छता अभियान ने जहां शहर की साफ-सफाई को नई दिशा दी है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की निजी जिंदगी पर इसका असर पड़ता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि कुछ कर्मचारियों को घर में तनाव और विवाद का सामना करना पड़ रहा है, यहां तक कि तलाक जैसी स्थिति की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।
दरअसल, पिछले करीब 50-55 दिनों से नगर निगम के कर्मचारियों को रोजाना सुबह लगभग 7 बजे स्वच्छता अभियान के तहत ड्यूटी पर बुलाया जा रहा है। इस कारण कर्मचारियों को रोजाना बहुत जल्दी उठकर तैयार होना पड़ता है और समय से पहले कार्यस्थल पर पहुंचना अनिवार्य हो गया है। लगातार बदलती इस दिनचर्या का असर अब उनके पारिवारिक जीवन पर दिखने लगा है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि घर में रोजाना इस बात को लेकर विवाद हो रहा है। उनका कहना है, “स्थिति यह हो गई है कि समझ नहीं आता ड्यूटी संभालें या घर की स्थिति। परिवार वाले सवाल करते हैं कि रोज सुबह इतनी जल्दी क्यों निकलना पड़ता है। जब उन्हें बताया जाता है कि स्वच्छता अभियान के तहत बुलाया जाता है, तो वे इसे सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते।”
कर्मचारियों के अनुसार, सरकारी नौकरी की पारंपरिक समय-सारिणी से अलग इस तरह की नियमित सुबह की ड्यूटी ने परिवारों में असमंजस पैदा कर दिया है। कई मामलों में पति-पत्नी के बीच बहस और तनाव बढ़ गया है, जिससे घरेलू माहौल प्रभावित हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति केवल एक-दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारी इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा, लेकिन अंदरखाने असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इस संदर्भ में नगर निगम प्रशासन, विशेषकर कमिश्नर विनय कुमार से अपेक्षा की जा रही है कि वे कर्मचारियों की समस्याओं को समझें और उनकी निजी जिंदगी को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी व्यवस्था में संतुलन बनाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संस्था की कार्यक्षमता उसके कर्मचारियों के मानसिक और पारिवारिक संतुलन पर भी निर्भर करती है। ऐसे में यदि कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव डाला जाता है, तो इसका नकारात्मक असर कार्य पर भी पड़ सकता है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और कर्मचारियों को राहत देने के लिए कोई ठोस समाधान निकालता है या नहीं।




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