कमिश्नर के दफ्तर में मोबाइल लेकर जाने से रोके जाने पर भड़के सिंगर रॉकी मित्तल और सोशल मीडिया पर वीडियो किया जारी
गुरुवार को मशहूर सिंगर रॉकी मित्तल नगर निगम कमिश्नर विनय कुमार से मिलने पहुंचे थे परंतु कमिश्नर से मिलने के पहले ही उनकी भिड़ंत उनके सिक्योरिटी गार्ड से हो गई । सिक्योरिटी गार्ड ने मित्तल से कहा कि आप मोबाइल लेकर अंदर नहीं जा सकते इसी बात को लेकर मित्तल और सिक्योरिटी गार्ड में काफी बहस हुई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर रॉकी मित्तल ने जारी किया है । वीडियो में सुना जा सकता है कि रॉकी मित्तल कह रहे हैं कि यह सरकारी दफ्तर है और आपको किस बात का डर है जो आप मोबाइल लेकर के अंदर जाने से मना कर रहे हैं क्या यहाँ कुछ गड़बड़ झाला होता हैं ? हालांकि वीडियो में उन्होंने कमिश्नर की तारीफ भी की उन्होंने कहा कि मैने कमिश्नर से एक गंभीर मुद्दे पर उनका ध्यान आकर्षित किया जिस पर उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक हफ्ते में इस समस्या का निदान कर दिया जाएगा । पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मेरा मोबाइल बाहर रखवाया जाता है और उसमें से कोई डाटा गायब हो जाता है या मेरे अकाउंट से कोई पैसा ट्रांसफर कर लेता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ।
क्यों रोका जा रहा है लोगों को मोबाइल लेकर जाने से अंदर ?
दरअसल यह प्रक्रिया बीते दिनों ही नगर निगम कमिश्नर द्वारा लागू की गई है पिछले शनिवार को नगर निगम के नवनियुक्त मेयर श्यामलाल बंसल ने पदभार ग्रहण किया था , तब बंसल के कमरे की फटी हुई कुर्सियों की तस्वीर खबरी प्रसाद अखबार की वेबसाइट और अख्बार में छप गई थी , उसके बाद से ही नगर निगम कमिश्नर ने मौखिक तौर पर सुरक्षा कर्मियों के आदेश जारी कर दिए थे कि कोई भी व्यक्ति ( खासतौर से पत्रकार बिना एंट्री किए हुए निगम दफ्तर में नहीं आएंगे ) और किसी भी प्रकार का मोबाइल दफ्तर में लेकर नहीं जाया जा सकता ।
सवाल यहां पर यही उठता है कि यह सरकारी दफ्तर है और सरकारी दफ्तर में किसी को आने-जाने के पहले एंट्री का आदेश देने के लिए नगर निगम कमिश्नर विनय कुमार को किसने अधिकृत किया है । और सबसे बड़ी बात है पत्रकारों की , ऐसा कौन सा नियम और कहां से लागू हुआ है जिसमें यह कहा गया हो कि पत्रकार नगर निगम के दफ्तर में जाने के पहले एंट्री करेंगे । ऐसा लगता है कि यह सिर्फ पत्रकारों को परेशान करने के लिए एक तुगलकी फरमान है , ताकि नगर निगम कर्मी अंदर खाने कुछ भी काम करते रहे और किसी को भनक तक ना लगे । इससे भी ज्यादा यह की पत्रकार वहां कम आए और जाएं और निगम की खबरें छप ना सके । और अगर छपे भी तो सिर्फ वही खबर जिसको निगम के कमिश्नर साहब चाहते हैं ।




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