बढ़ती हीटवेव पर PGI चंडीगढ़ की चेतावनी : घरों के भीतर की गर्मी भी बन रही स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा
6लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की घटनाओं के बीच Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGI) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि गर्मी का खतरा केवल बाहर ही नहीं, बल्कि घरों के अंदर भी तेजी से बढ़ रहा है। विश्व हीट एक्शन डे और पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य, मौसम विज्ञान और पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हीटवेव से बचाव के उपायों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार अग्रवाल ने कहा कि गर्मी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए वैज्ञानिक शोध और जागरूकता दोनों जरूरी हैं। स्थानीय स्तर पर जुटाए गए आंकड़े और अध्ययन भविष्य में बेहतर नीतियां बनाने में सहायक साबित हो सकते हैं।
India Meteorological Department के चंडीगढ़ केंद्र के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि पिछले एक दशक में हीटवेव वाले दिनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि समय पर जारी मौसम चेतावनियां लोगों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और नागरिकों को मौसम विभाग के अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों ने विशेष रूप से “इंडोर हीट” यानी घरों के भीतर बढ़ते तापमान पर चिंता जताई। उनका कहना था कि कई बार घरों में लंबे समय तक गर्मी बनी रहती है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो गंभीर स्थिति में जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।
कार्यक्रम में यह भी सुझाव दिया गया कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, भवनों में बेहतर वेंटिलेशन, कूल रूफ तकनीक अपनाने और प्रभावी हीट अलर्ट सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि हीटवेव से प्रभावी मुकाबले के लिए स्वास्थ्य विभाग, मौसम विभाग, स्थानीय प्रशासन और समुदायों को मिलकर काम करना होगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है, जिसके प्रति समय रहते जागरूकता और तैयारी बेहद आवश्यक है।




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