इलेक्शन से हो या सिलेक्शन से, पर पंचकूला अग्रवाल समाज का प्रधान कब चुना जाएगा?
आठ महीने से अधर में लटकी चुनाव प्रक्रिया, अब रजिस्ट्रार कार्यालय के फैसले पर टिकी निगाहें
पंचकूला। पंचकूला का सबसे प्रभावशाली और संगठित माना जाने वाला अग्रवाल समाज पिछले लगभग आठ महीने से एक ऐसे प्रशासनिक और संगठनात्मक संकट से गुजर रहा है, जिसका समाधान अब केवल और केवल रजिस्ट्रार कार्यालय के पास दिखाई दे रहा है। समाज से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि रजिस्ट्रार कार्यालय चाहे तो अगले 40 से 45 दिनों के भीतर अग्रवाल समाज को उसका नया प्रधान मिल सकता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिरकार चुनाव प्रक्रिया कब आगे बढ़ेगी और समाज को उसका नेतृत्व कब मिलेगा?
इस पूरे मामले को समझने के लिए थोड़ा इतिहास के आईने में झांकना जरूरी है।
कई वर्षों से नहीं हुए चुनाव, शिकायत पहुंची रजिस्ट्रार कार्यालय तक
दरअसल पंचकूला अग्रवाल समाज में चुनाव को लेकर पिछले काफी समय से रस्साकशी चल रही थी। लंबे समय तक अमित जिंदल कन्वीनर की भूमिका निभाते रहे। कन्वीनर के तौर पर उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों और सदस्यों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। कई मौकों पर उन्हें सफलता भी मिली, जबकि कुछ प्रयास अंतिम चरण तक पहुंचकर अधूरे रह गए।
इसी बीच समाज के कुछ सदस्यों ने यह मुद्दा रजिस्ट्रार कार्यालय तक पहुंचाया कि अग्रवाल समाज में पिछले कई वर्षों से नियमित चुनाव नहीं कराए गए हैं। शिकायतों के बाद आखिरकार 12 नवंबर 2025 को अग्रवाल भवन पर सरकारी पहरा बैठा दिया गया और चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक रिटायर्ड जज की नियुक्ति की गई।
उस नियुक्ति को भी अब लगभग आठ महीने बीत चुके हैं। इस दौरान नियुक्त किए गए रिटायर्ड जज ने चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपने स्तर पर लगातार प्रयास किए, लेकिन मामला अंततः रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर अटक गया।
2841 सदस्यों का रिकॉर्ड तैयार, फिर भी फाइल आगे नहीं बढ़ी
यदि पिछले आठ महीनों की प्रक्रिया पर नजर डालें तो चुनाव कराने के लिए नियुक्त रिटायर्ड जज ने अग्रवाल समाज के 2841 सदस्यों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करवाया। इसी आधार पर 118 कॉलेजियम बनाए गए, जिनमें प्रत्येक कॉलेजियम में लगभग 25-25 सदस्यों को शामिल किया गया।
पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा रजिस्ट्रार कार्यालय को भेज दिया गया। लेकिन वहां से आपत्ति दर्ज करते हुए फाइल वापस भेज दी गई। आपत्ति यह थी कि सदस्यों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जानकारी के अनुसार उस समय अग्रवाल समाज के पास डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके बाद पूरे रिकॉर्ड को दोबारा डिजिटाइज किया गया और रजिस्ट्रार कार्यालय को सूचित किया गया कि अब सभी आवश्यक दस्तावेज डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध हैं।
इसके बावजूद एक बार फिर रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से नई आपत्तियां दर्ज कर दी गईं। समाज की ओर से उन आपत्तियों को भी दूर कर दिया गया और आवश्यक संशोधन करके दस्तावेज पुनः जमा करवा दिए गए।
6 अप्रैल को लिखा गया पत्र, 30 अप्रैल को भेजा गया रिमाइंडर
सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 6 अप्रैल 2026 को चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय को एक औपचारिक पत्र भेजा गया। जब उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला तो 30 अप्रैल 2026 को उसका रिमाइंडर भी भेज दिया गया।
सूत्रों के अनुसार इन पत्रों की प्रतियां संबंधित पक्षों के पास उपलब्ध हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार पत्र और रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया गया।
समाज के सदस्यों के बीच भी यही चर्चा है कि जब अधिकांश औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं तो चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में देरी किस वजह से हो रही है।
क्या है चुनाव कराने की प्रक्रिया?
यदि चुनाव प्रक्रिया की बात करें तो इसके लिए रजिस्ट्रार कार्यालय को सबसे पहले एक रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और एक ऑब्जर्वर नियुक्त करना होगा।
इसके बाद चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा तथा कम से कम दो समाचार पत्रों में चुनाव संबंधी विज्ञापन प्रकाशित करवाए जाएंगे। नामांकन, जांच, नाम वापसी और मतदान की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के अनुसार संपन्न होगी।
जानकारों का कहना है कि यह प्रक्रिया या तो रजिस्ट्रार कार्यालय स्वयं कर सकता है या फिर एक पत्र जारी कर चुनाव संबंधी सभी अधिकार उस रिटायर्ड जज को सौंप सकता है, जिन्हें पहले से ही अग्रवाल भवन में प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है।
यदि ऐसा होता है तो जज साहब भी चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर समाज को उसका नया नेतृत्व दिलाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
कौन-कौन हैं अग्रवाल समाज के संभावित दावेदार?
अग्रवाल समाज के मुखिया बनने की दौड़ को लेकर समाज के भीतर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। हालांकि अभी किसी भी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कई चेहरे ऐसे हैं जिनके नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
इनमें अमित जिंदल, तेजपाल गुप्ता, चंद्रभान गोयल (सीबी गोयल), प्रदीप गर्ग, राकेश अग्रवाल, जगमोहन गर्ग और सत्य प्रकाश अग्रवाल प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा भी कई अन्य नाम समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि चुनाव की घोषणा होते ही तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी तथा कई नए नाम भी सामने आ सकते हैं।
इलेक्शन या सिलेक्शन, समाज में अभी भी जारी है बहस
करीब छह महीने पहले अग्रवाल समाज की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई थी जब प्रदीप गर्ग ने चुनाव की बजाय चयन प्रक्रिया का समर्थन किया था।
उन्होंने सुझाव दिया था कि समाज को चुनावी मुकाबले से बचते हुए सर्वसम्मति के आधार पर प्रधान का चयन करना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि सभी लोग मिल-बैठकर किसी एक नाम पर सहमत हो जाएं तो समाज में एकता बनी रहेगी और चुनावी प्रतिस्पर्धा से पैदा होने वाले मतभेदों से भी बचा जा सकेगा।
हालांकि समाज के एक वर्ग का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव ही सबसे उचित रास्ता है और प्रधान का चयन मतदान के माध्यम से ही होना चाहिए।
अब सबकी निगाहें रजिस्ट्रार कार्यालय पर
फिलहाल पूरे मामले में गेंद रजिस्ट्रार कार्यालय के पाले में दिखाई दे रही है। समाज के हजारों सदस्य, संभावित उम्मीदवार और सामाजिक कार्यकर्ता अब इस इंतजार में हैं कि आखिरकार चुनाव प्रक्रिया को हरी झंडी कब मिलेगी।
चुनाव हो या सर्वसम्मति से चयन, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है—पंचकूला अग्रवाल समाज को उसका नया प्रधान आखिर कब मिलेगा?



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