भारतीय क्रिकेटरों के लिए फिटनेस टेस्ट हुआ और कठिन, BCCI ने ब्रोंको टेस्ट का समय घटाया; चोटों और गिरती फिटनेस के बीच बड़ा फैसला
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बड़ा कदम उठाया है। लगातार बढ़ती चोटों और फिटनेस मानकों में गिरावट को देखते हुए बोर्ड ने राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट के नियम और सख्त कर दिए हैं। अब खिलाड़ियों को पहले की तुलना में कम समय में ब्रोंको टेस्ट पूरा करना होगा, जबकि 2 किलोमीटर दौड़ (2K टेस्ट) के लिए भी निश्चित समय सीमा तय कर दी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की सिफारिशों के बाद यह बदलाव लागू किया गया है। BCCI का उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मैदान पर उनकी गतिशीलता (मोबिलिटी) को बेहतर बनाना है, ताकि भविष्य में चोटों की संख्या कम की जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन में निरंतरता बनी रहे।
ब्रोंको टेस्ट का समय हुआ कम
नए नियमों के तहत अब खिलाड़ियों को 1200 मीटर का ब्रोंको टेस्ट 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड के भीतर पूरा करना होगा। पहले यही टेस्ट लगभग 6 मिनट में पूरा करना होता था। यानी अब खिलाड़ियों को पहले से अधिक तेज गति और बेहतर सहनशक्ति का प्रदर्शन करना होगा।
इसके साथ ही BCCI ने 2 किलोमीटर दौड़ (2K रन) के लिए भी 9 से 10 मिनट की समय सीमा तय कर दी है। यह टेस्ट खिलाड़ियों की एरोबिक फिटनेस और लंबी अवधि तक प्रदर्शन करने की क्षमता को परखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
यो-यो टेस्ट की जगह ब्रोंको टेस्ट पर जोर
भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक खिलाड़ियों की फिटनेस मापने के लिए यो-यो टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि अब बोर्ड ने ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिक फिटनेस टेस्ट के रूप में अपनाया है।
ब्रोंको टेस्ट में खिलाड़ियों को लगातार 20, 40 और 60 मीटर की स्प्रिंट लगानी होती है और पूरे टेस्ट के दौरान कुल 1200 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यह टेस्ट केवल स्टैमिना ही नहीं बल्कि स्पीड, रिकवरी और दिशा बदलने की क्षमता का भी आकलन करता है।
वहीं यो-यो टेस्ट में खिलाड़ी को लगातार 20-20 मीटर की दौड़ निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होती है। हर स्तर के साथ गति बढ़ती जाती है और खिलाड़ी जितने अधिक स्तर पार करता है, उसका स्कोर उतना बेहतर माना जाता है।
फिटनेस मानकों में ढील पर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान फिटनेस टेस्ट के नियमों का सभी खिलाड़ियों के लिए समान रूप से पालन नहीं किया गया। कुछ खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद चयन के लिए मंजूरी मिलने की बात भी सामने आई है।
बताया गया है कि तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को पूर्ण फिटनेस हासिल किए बिना टीम में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। बाद में इंग्लैंड दौरे के दौरान हर्षित राणा को वापस भेजना पड़ा। उस समय उनके बढ़े हुए वजन को भी एक कारण बताया गया था।
अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने उनके लिए वजन की अधिकतम सीमा तय की है और रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल उनका वजन निर्धारित मानक के भीतर पहुंच चुका है।
बार-बार चोटिल होने से BCCI चिंतित
पिछले कुछ महीनों में भारतीय टीम के कई अहम खिलाड़ी अलग-अलग चोटों के कारण टीम से बाहर रहे हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत, ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर, बल्लेबाज तिलक वर्मा, स्पिनर वरुण चक्रवर्ती, ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी, तेज गेंदबाज हर्षित राणा और स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों को विभिन्न श्रृंखलाओं और टूर्नामेंटों से बाहर होना पड़ा।
इन लगातार चोटों ने टीम चयन और प्रदर्शन दोनों को प्रभावित किया है। इसी वजह से बोर्ड अब फिटनेस प्रबंधन को लेकर अधिक सतर्क नजर आ रहा है।
टीम फिजियो से मांगा गया जवाब
खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने के बाद BCCI सचिव देवजीत सैकिया और टीम प्रबंधन ने टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन से भी स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है।
सूत्रों के अनुसार, टीम प्रबंधन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी खिलाड़ी के स्टार दर्जे या अनुभव को देखते हुए फिटनेस मानकों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी खिलाड़ी की फिटनेस निर्धारित स्तर से कम पाई जाती है तो उसकी तत्काल जानकारी बोर्ड को दी जाएगी।
टीम प्रबंधन का मानना है कि कुछ खिलाड़ियों की मैदान पर गति और रनिंग क्षमता में कमी देखने को मिली है, जिसका असर मैच के दौरान रन लेने और लंबे समय तक बल्लेबाजी करने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।
बुमराह की फिटनेस ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की गई है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के पहले मैच तक फिट करने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।
इस घटना के बाद खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया और फिटनेस प्रबंधन की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है।
विशेषज्ञों ने जताई ओवर-ट्रेनिंग की चिंता
हालांकि BCCI फिटनेस मानकों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है, लेकिन खेल विज्ञान से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने अत्यधिक फिटनेस टेस्ट और लगातार कड़े वर्कलोड को लेकर चिंता भी जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खिलाड़ियों पर लगातार यो-यो टेस्ट, ब्रोंको टेस्ट और 2K रन जैसे परीक्षणों का दबाव बढ़ाया गया तो इससे मानसिक और शारीरिक थकान (बर्नआउट) का खतरा बढ़ सकता है। अधिक वर्कलोड के कारण मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से चोट लगने की संभावना भी बढ़ सकती है।
खिलाड़ियों की फिटनेस पर BCCI का स्पष्ट संदेश
BCCI के नए फैसले से साफ संकेत मिला है कि अब भारतीय टीम में चयन के लिए केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर की फिटनेस भी अनिवार्य होगी। बोर्ड चाहता है कि हर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तेज रफ्तार और लगातार व्यस्त कार्यक्रम के अनुरूप पूरी तरह तैयार रहे।
आने वाले समय में ब्रोंको टेस्ट, 2K रन और अन्य फिटनेस मानकों के आधार पर खिलाड़ियों की नियमित निगरानी की जाएगी। माना जा रहा है कि यह कदम भारतीय क्रिकेट में फिटनेस संस्कृति को और मजबूत बनाने तथा चोटों की संख्या कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।



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