जब ले रहे हों भगवान राम का नाम…तो पैरों में जूते का क्या काम?
भारत में भगवान राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, श्रद्धा और संस्कारों का प्रतीक हैं। जब भी कोई व्यक्ति भगवान राम का स्मरण करता है, तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से श्रद्धा का भाव जाग जाता है। यही कारण है कि मंदिर हो या धार्मिक मंच, लोग जूते-चप्पल उतारकर ही भगवान के सामने खड़े होते हैं।
लेकिन सवाल तब खड़ा होता है, जब सार्वजनिक मंच पर मर्यादा का पालन होता हुआ दिखाई न दे।
मामला हरियाणा के पंचकूला में आयोजित बसंत उत्सव कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी गजेंद्र फोगाट मंच पर भगवान राम की प्रतिमा के सामने जूते पहनकर ही राम भजन गाते नजर आ रहे हैं।
अब यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है और लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामान्य घटना मान रहे हैं।
लेकिन बड़ा सवाल यही है— जब बात आस्था और परंपरा की हो, तो क्या सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को और ज्यादा संवेदनशील नहीं होना चाहिए?



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