पंचकूला नगर निगम में डेढ़ अरब रुपये के फर्जी एफडी घोटाले में चौथी गिरफ्तारी, तत्कालीन अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक गिरफ्तार
हरियाणा के पंचकूला नगर निगम में सामने आए करीब डेढ़ अरब रुपये के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले में जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज करते हुए गुरुवार को चौथी गिरफ्तारी कर ली। इस बार पहली बार नगर निगम के किसी कर्मचारी पर शिकंजा कसा गया है। जांच एजेंसी ने तत्कालीन अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पिछले कुछ दिनों से पूछताछ जारी थी।
पूछताछ के बाद अस्पताल और फिर गिरफ्तारी
सूत्रों के अनुसार, विकास कौशिक को एक दिन पहले जांच एजेंसी ने संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के अगले ही दिन उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, गुरुवार को जांच एजेंसी ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि कौशिक से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
घोटाले की परतें खुलनी शुरू
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला नगर निगम के फंड से जुड़े फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट तैयार करने और करोड़ों रुपये के गबन से संबंधित है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि निगम के खातों से धनराशि को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। इस घोटाले की राशि लगभग 150 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।
जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं, जिसमें बैंकिंग चैनल, आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाएं और बाहरी सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
राजनीतिक कनेक्शन पर भी उठे सवाल
विकास कौशिक को हरियाणा के पूर्व विधायक और पूर्व विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का करीबी माना जाता है। सोशल मीडिया पर दोनों की कई तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे विभिन्न कार्यक्रमों में साथ दिखाई देते हैं। इसके अलावा, कौशिक के सत्तारूढ़ दल के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भी संबंध होने की चर्चाएं हैं।

इन तथ्यों के सामने आने के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है।
क्या कमजोर पड़ रही है राजनीतिक पकड़?
हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि ज्ञानचंद गुप्ता की संगठन और सरकार में पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही। बीते दिनों एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अनुपस्थिति को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

अब उनके करीबी माने जाने वाले अधिकारी की गिरफ्तारी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। हालांकि, इस पर सरकार या संबंधित नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सोशल मीडिया से जुड़े संकेत
जांच एजेंसियां विकास कौशिक के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच कर रही हैं। शुरुआती विश्लेषण में यह संकेत मिले हैं कि उनके संबंध सत्ता और प्रशासन के उच्च स्तर तक थे। कई तस्वीरें और पोस्ट ऐसे सामने आए हैं, जो उनके प्रभावशाली नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही, यह भी संभावना जताई जा रही है कि इस घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों और बाहरी लोगों की भूमिका भी उजागर होगी।
फिलहाल, विकास कौशिक को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे घोटाले की साजिश, इसमें शामिल लोगों और पैसों के प्रवाह की सटीक जानकारी जुटाई जा सके।



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