वार्ड 3 : विकास के दम पर मांग रही पूर्व पार्षद टिकट पर जातीय समीकरणों से होगा सामना
नगर निगम चुनाव के तहत वार्ड नंबर-3 इस बार राजनीतिक रूप से बेहद अहम बनता जा रहा है। पिछली बार महिला आरक्षित रही इस सीट से भाजपा की पार्षद रितु गोयल ने जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार सीट सामान्य घोषित होने से नए समीकरण उभर आए हैं।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बीते कार्यकाल में क्षेत्र में कई विकास कार्य हुए हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल को कुछ हद तक बढ़त मिल सकती है। हालांकि, यह वार्ड बनिया बाहुल्य माना जाता है और यहां चुनावी नतीजे काफी हद तक इसी वोट बैंक के रुझान पर निर्भर करते हैं। ऐसे में इस बार मुकाबला बनियों में अंदरूनी लड़ाई के बीच फंस गया है और इसका फायदा कोई तीसरा भी ले सकता है ।

भाजपा में टिकट को लेकर अंदरूनी प्रतिस्पर्धा साफ दिखाई दे रही है। अमित गोयल ने युवा चेहरे के तौर पर अपनी दावेदारी पेश की है। वे सेक्टर-7 व्यापार मंडल के अध्यक्ष होने के साथ विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं और पार्टी के ‘युवा फोकस’ को अपनी ताकत के रूप में देख रहे हैं। वहीं पत्रकार सुरेंद्र गोयल भी इस वार्ड से टिकट के उम्मीद लगाकर भाजपा कार्यालय और भाजपा नेताओं के चक्कर काट रहे हैं ।

तो वही भाजपा की टिकट पर वेणु राव अपनी दावेदारी इसी वार्ड से ठोक रही है। पिछली बार भी उन्होंने इसी वार्ड से चुनाव लड़ा था पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी पर इस बार उनको जीत हासिल होने की पूरी-पूरी उम्मीद है । उनका कहना है कि पिछले 5 साल का अनुभव उनके काम इस बार आएगा ।

पार्टी के भीतर एक किसी कार्यकर्ता का नाम भी चर्चा में है, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि टिकट को लेकर अनिश्चितता के चलते वे अन्य दलों के संपर्क कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि टिकट वितरण के बाद असंतोष की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस की ओर से इस वार्ड में रजनीश सिंगला ने दावेदारी ठोकी है । रजनीश सिंगल कि अगर बात की जाए तो वह पुराने कांग्रेसी है और कई चुनाव लोगों को लाडवा कर जितवा भी चुके हैं पर खुद पहली बार चुनाव लड़ने के लिए मैदान में सामने है और उनका दावा है कि जनता ने इस बार बदलाव का मन बनाया हुआ है , इसलिए जनता कांग्रेस को ही चुनेगी । न सिर्फ वार्ड नंबर 3 में बल्कि कांग्रेस बहुमत के साथ सदन में वापसी करेगी ।

वहीं इंडियन नेशनल लोकदल, जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे दल इस वार्ड में संभावित बागी उम्मीदवारों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि उन्हें चुनावी मैदान में उतारा जा सके।
कुल मिलाकर, वार्ड नंबर-3 में इस बार मुकाबला केवल विकास के दावों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जातीय समीकरण, संगठनात्मक एकजुटता और टिकट बंटवारे के बाद की स्थिति भी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
तो वहीं भाजपा को उस कार्यकर्ता पर भी निगाह रखनी होगी जो की अभी से ही रूठ गया है और जिसके दूसरे दल में जाने की चर्चा है ।




Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!