पंचकूला में बसंत उत्सव की धूम आज से, लेकिन चुनावी रंग ने बढ़ाई सियासी गर्मी
पंचकूला। शहर के सबसे चर्चित सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बसंत उत्सव की शुरुआत आज से होने जा रही है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करेंगे। आमतौर पर दो दिन चलने वाला यह उत्सव इस बार पहली बार तीन दिनों तक आयोजित किया जा रहा है, जिससे मेले का उत्साह और भी बढ़ गया है।
हालांकि इस बार बसंत उत्सव सिर्फ सांस्कृतिक रंगों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि मेले में चुनावी माहौल की भी झलक साफ दिखाई दे रही है।
मेले में चुनावी जागरूकता के खास स्टॉल
मेले में इस बार एक चौंकाने वाली बात यह देखने को मिल रही है कि नगर निगम चुनाव को लेकर विशेष स्टॉल लगाए गए हैं। हरियाणा चुनाव आयोग और नगर निगम की संयुक्त टीम की ओर से पूरे मेला क्षेत्र में चार अलग-अलग काउंटर स्थापित किए गए हैं।
इन काउंटरों पर चुनाव आयोग और नगर निगम के कर्मचारी लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करते नजर आ रहे हैं। मेले में पहुंचने वाले नागरिकों को मतदान का महत्व समझाने और अधिक से अधिक वोट डालने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है।
अप्रैल या मई में हो सकते हैं निगम चुनाव
गौरतलब है कि पंचकूला में नगर निगम चुनाव प्रस्तावित हैं। सूत्रों के अनुसार संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के अंत तक या मई के दूसरे सप्ताह से पहले चुनाव करवा लिए जाएं। ऐसे में बसंत उत्सव जैसे बड़े आयोजन में चुनावी जागरूकता अभियान को लेकर सरकार की सक्रियता भी चर्चा का विषय बन गई है।
दरअसल, आमतौर पर नगर निगम चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 60% के आसपास ही रहता है। चूंकि बसंत उत्सव में शहर के हजारों लोग पहुंचते हैं, इसलिए इस मंच से मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश भी साफ दिखाई दे रही है कि “वोट जरूर करें”।
पोस्टरों और कटआउट्स ने बढ़ाई सियासी चर्चा
मेले में लगे बड़े-बड़े कटआउट और पोस्टर भी चर्चा में हैं। कई जगहों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें भी दिखाई दे रही हैं। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के बहाने कहीं न कहीं भाजपा का परोक्ष प्रचार भी हो रहा है।
भाजपा बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर तय
आने वाले नगर निगम चुनाव को लेकर शहर में सियासी तापमान भी बढ़ने लगा है। इस बार मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा माना जा रहा है।
अगर पिछले चुनाव की बात करें तो मौजूदा मेयर कुलभूषण गोयल करीब 2000 वोटों के मामूली अंतर से जीतकर सदन में पहुंचे थे। उस समय हरियाणा में भाजपा और जननायक जनता पार्टी का गठबंधन था और कांग्रेस का संगठन भी उतना मजबूत नहीं माना जाता था।
लेकिन 2026 की तस्वीर अलग दिखाई दे रही है। इस बार कांग्रेस के पास संगठन भी मजबूत है और भाजपा को सरकार में कोई गठबंधन सहयोगी भी नहीं है। ऐसे में पंचकूला नगर निगम चुनाव को लेकर मुकाबला काफी दिलचस्प और कांटे का होने की संभावना जताई जा रही है।
बसंत उत्सव के रंगों के बीच अब पंचकूला की सियासत भी धीरे-धीरे गर्म होती नजर आ रही है।




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