ईरान-जंग का असर भारत की पानी की बोतलों पर: कारोबारियों में बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में पैकेज्ड पानी की मांग तेज होती है, लेकिन इस बार ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते बोतलबंद पानी के उद्योग में हलचल बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के प्रभाव से प्लास्टिक, लेबल, ढक्कन और पैकेजिंग बॉक्स की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे रिटेल मार्केट में भी कीमतों पर असर पड़ सकता है।
पानी की बोतल महंगी क्यों हो सकती है?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों के चलते पॉलीमर की लागत में वृद्धि हुई है। पॉलीमर, जो प्लास्टिक बोतल बनाने में जरूरी है, की कीमतें 50% बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं। इसके अलावा, ढक्कनों की कीमत दोगुनी से ज्यादा 0.45 रुपये प्रति नग हो गई है। नालीदार बक्से, लेबल और चिपकने वाली टेप भी महंगी हो गई हैं।
गुजरात की प्लास्टिक यूनिट्स पर बड़ा असर
गुजरात भारत का सबसे बड़ा प्लास्टिक उत्पादन केंद्र है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35-40% बनाता है। यहां 10,000 से अधिक यूनिट्स हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद PET पॉलीमर की कीमतें 12 दिनों में लगभग 40% बढ़ गई हैं, जिससे उत्पादन पर दबाव बढ़ा है।
गुजरात स्टेट प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GSPMA) के अनुसार, पॉलीमर की कीमतों में 18 रुपये से 32 रुपये प्रति किलोग्राम तक की वृद्धि हुई है। छोटे निर्माता अब अपने ऑर्डर पूरा करने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं, जबकि गर्मियों में पानी की बोतलों की मांग सबसे अधिक होती है।
उद्योग की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल और पॉलीमर की कीमतों में तेजी जारी रही, तो रिटेल मार्केट में बोतलबंद पानी की कीमतों में इजाफा हो सकता है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम निर्माताओं पर उत्पादन और वितरण का दबाव और बढ़ जाएगा।



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