धमकियों के साए में भी सक्रिय रहा कार्यकर्ता, अब सोशल मीडिया पोस्ट पर सियासी संग्राम
नगर निगम चुनाव से पहले पंचकूला की राजनीति में वार्ड नंबर 6 एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भाजपा से पार्षद पद की दावेदारी जता रहे प्रमोद शर्मा का नाम दो अलग-अलग कारणों से सुर्खियों में है—एक ओर उन्हें पूर्व में मिली कथित जान से मारने की धमकियां, और दूसरी ओर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज हुआ देशद्रोह का मामला।
प्रमोद शर्मा का दावा है कि 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान, जब उन्हें राजीव कॉलोनी क्षेत्र में पार्टी प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब उन्हें कई बार धमकियां दी गईं कि वे भाजपा के पक्ष में प्रचार न करें। इसके बावजूद उन्होंने न केवल प्रचार जारी रखा, बल्कि खुद को “कट्टर कार्यकर्ता” बताते हुए पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा कायम रखी। लगभग दो दशक से संगठन से जुड़े शर्मा मंडल अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय रहे हैं और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ मानी जाती है।
इसी बीच, एक अलग विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक सामग्री साझा करने के आरोप में प्रमोद शर्मा की शिकायत पर पंचकूला पुलिस ने देशद्रोह से जुड़ा मामला दर्ज किया है। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित पोस्ट में राष्ट्रीय नेतृत्व और केंद्र सरकार के खिलाफ गलत जानकारी प्रसारित कर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में साइबर सेल को जांच सौंपी गई है और सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट सहित तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि 2017 के बाद पंचकूला में इस प्रकृति का यह पहला मामला है, जिसने प्रशासनिक और खुफिया एजेंसियों का ध्यान भी खींचा है। हरियाणा सीआईडी ने भी पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। एक ओर जहां प्रमोद शर्मा अपनी राजनीतिक सक्रियता और पुराने समर्पण को अपनी ताकत के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा विवाद चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके दुरुपयोग पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और गहराई दे सकती हैं।



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