जब कानून और समाज आमने–सामने खड़े हों
व्यक्ति की स्वतंत्रता, पारिवारिक मर्यादा और एक त्रासदी का गहन सामाजिक विश्लेषण “स्वतंत्रता और परंपरा—दोनों अपने-अपने स्थान पर सही, पर जब टकराते हैं तो सबसे पहले टूटता है एक सामान्य परिवार। कानून अपना काम करता है, समाज अपनी जिद पर अड़ा रहता है, और बीच में पिस जाता है वह घर जिसने न विद्रोह किया, […]
