केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: महंगाई भत्ता 2% बढ़कर 60% हुआ, 1 जनवरी 2026 से लागू—1.19 करोड़ कर्मचारियों-पेंशनर्स को राहत
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महंगाई के दबाव के बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद DA-DR की दर 58% से बढ़कर 60% हो गई है। यह संशोधन 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस निर्णय से करीब 50.5 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार पर इससे सालाना लगभग 6,791 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा।
हर छह महीने में होता है संशोधन
केंद्र सरकार परंपरागत रूप से साल में दो बार—जनवरी और जुलाई—में DA और DR की दरों की समीक्षा करती है। इससे पहले जुलाई 2025 से लागू संशोधन में DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था।
नई वृद्धि के बाद कर्मचारियों की मासिक सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच उनकी क्रय शक्ति को सहारा मिलेगा।
क्या होता है महंगाई भत्ता (DA)?
महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के वेतन का एक अहम हिस्सा होता है, जिसे ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग एडजस्टमेंट’ के रूप में दिया जाता है। यह मूल वेतन (बेसिक पे) का एक निश्चित प्रतिशत होता है और इसका उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को संतुलित करना है।
जैसे-जैसे महंगाई दर बढ़ती है, DA भी बढ़ाया जाता है ताकि कर्मचारियों की वास्तविक आय पर असर कम पड़े।
8वें वेतन आयोग की मांग तेज
DA में बढ़ोतरी का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कर्मचारी संगठन आगामी 8वां वेतन आयोग को लेकर अपनी मांगें तेज कर रहे हैं।
नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने सरकार को सौंपे ज्ञापन में 3.83 के उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹69,000 तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, संगठनों ने वेतन निर्धारण में आश्रित माता-पिता को शामिल करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने जैसे सुझाव भी दिए हैं।

वेतन आयोग लागू होने तक DA जारी रहेगा
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता, तब तक DA मौजूदा प्रणाली के तहत बेसिक वेतन के प्रतिशत के रूप में मिलता रहेगा और हर छह महीने में संशोधित होता रहेगा।
नया वेतन आयोग लागू होने पर वर्तमान DA को बेसिक सैलरी में समाहित (मर्ज) कर दिया जाता है और DA फिर से शून्य से शुरू होता है।
सैलरी स्ट्रक्चर में संभावित बदलाव
8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और विभिन्न भत्तों में व्यापक बदलाव होने की संभावना है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹35,400 है और 3.83 का फिटमेंट लागू होता है, तो नई बेसिक सैलरी ₹1.35 लाख से अधिक हो सकती है। हालांकि, DA शून्य हो जाने के कारण शुरुआती गणना में कुल वेतन संरचना अलग दिख सकती है।
किन्हें मिलेगा फायदा, कौन रहेगा बाहर
इस फैसले का लाभ केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों, रेलवे कर्मचारियों, केंद्रीय संस्थानों के शिक्षकों, 100% सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों और पेंशनर्स को मिलेगा।
वहीं राज्य सरकारों के कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य नियामक संस्थाओं के कर्मचारी इस दायरे में नहीं आते। वे अपने-अपने अलग वेतन समझौतों या राज्य स्तरीय आयोगों पर निर्भर रहते हैं।
चुनावी और आर्थिक असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि DA में यह बढ़ोतरी न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि उपभोक्ता खर्च को भी बढ़ावा दे सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
हालांकि, सरकार के लिए यह वित्तीय बोझ बढ़ाने वाला कदम भी है, इसलिए भविष्य में वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी।
आगे क्या?
सरकार पहले ही अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे चुकी है। आयोग के गठन के बाद यह अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर सौंप सकता है।
संभावना जताई जा रही है कि आयोग की सिफारिशें 2027-28 तक लागू हो सकती हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर का भी लाभ मिल सकता है, जो एकमुश्त या किस्तों में दिया जा सकता है।
कुल मिलाकर, महंगाई भत्ते में यह ताजा बढ़ोतरी केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है, जबकि आने वाले समय में वेतन आयोग की सिफारिशें उनके वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।




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