एक जनवरी बनाम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
कालबोध का द्वंद्व या एक सांस्कृतिक धर्मयुद्ध किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए ‘नववर्ष’ उसकी सामूहिक चेतना, उसकी जीवन-दृष्टि और प्रकृति के साथ उसके तादात्म्य का उद्घोष होता है। भारतवर्ष में कालबोध कभी भी यांत्रिक नहीं रहा। यह सदैव ब्रह्मंडीय, प्राकृतिक और आध्यात्मिक रहा है किंतु, वर्तमान कालखंड की विडंबना यह है कि भारतीय समाज […]
