बयानों में सख्त प्रतिबंध, धरातल पर ढीला अमल : साप्ताहिक मंडी में दुकानदार धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे प्लास्टिक लिफाफे, प्रशासन के दावे कटघरे में
एकल-उपयोग प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध और बार-बार की सरकारी चेतावनियों के बावजूद शहर की साप्ताहिक मंडियों में हकीकत अलग तस्वीर दिखा रही है। शनिवार को खबरी प्रशाद की पड़ताल में सेक्टर-14 की शनिवार मंडी में अधिकांश दुकानों पर प्लास्टिक के लिफाफे खुलेआम इस्तेमाल होते मिले। बड़ी संख्या में दुकानदार और ग्राहक सब्जी, फल और किराना सामान प्लास्टिक की थैलियों में ले जाते दिखे।

राज्य सरकार की ओर से 16 सितंबर 2025 को ‘एनवायरमेंट प्लान 2025’ की शुरुआत के दौरान प्लास्टिक से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई गई थी। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंगल-यूज प्लास्टिक को जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक बताया था। इसके बाद पिछले हफ्ते 13 फरवरी को जिला स्तर की बैठक में पंचकूला के उपायुक्त सतपाल शर्मा ने प्लास्टिक के भंडारण और उत्पादन पर सख्ती की बात दोहराई थी।

परंतु जमीनी स्थिति हालांकि इन बयानों से मेल नहीं खाती। मंडी में दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि ग्राहकों के पास कपड़े या जूट के थैले कम ही होते हैं, इसलिए मजबूरी में प्लास्टिक कैरी बैग देना पड़ता है। कुछ दुकानदारों का कहना था कि जब भी निरीक्षण टीम आती है तो सीमित चालान होते हैं, सूचना फैलते ही प्लास्टिक का स्टॉक अस्थायी रूप से हटा दिया जाता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बावजूद प्रभावी प्रवर्तन न होने से नीति का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है। प्रशासन के रिकॉर्ड में समय-समय पर चालान और जब्ती की कार्रवाई दर्ज है, लेकिन नियमित निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में बाजार व्यवहार नहीं बदल पा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती के साथ-साथ कपड़े के थैलों की उपलब्धता और जनजागरूकता अभियान को समानांतर चलाए, तो स्थिति सुधर सकती है। फिलहाल, सरकारी दावों और मंडी की वास्तविकता के बीच स्पष्ट अंतर नजर आ रहा है।
बाजारों में सिंगल उसे प्लास्टिक के धड़ले से इस्तेमाल को लेकर ऐसा लगता है कि प्लास्टिक हटाओ अभियान चलाने वाले तमाम एनजीओ भी सिर्फ खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं उनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ सरकारी अनुदान लेना होता है जब ऐसी संस्थाओं को सरकारी अनुदान लेना होता है तब कुछ समय के लिए वह दिखावे के तौर पर अभियान चला देते हैं और सरकार से जैसे ही माल जेब में आता है , सब कुछ ठंडे बस्ती में चला जाता है ।

क्या होना चाहिए ताकि लोग घर से लेकर निकले झोला या बैग !
हर साप्ताहिक मंडी में सरकार से अनुदान लेने वाली संस्थाओं के जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि वह अपना एक स्टॉल मंडी में लगे वहां पर सिंगल उसे प्लास्टिक से होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी लोगों को दें और इसके साथ-साथ कुछ थैली भी निशुल्क उपलब्ध कराए जाने चाहिए और इन संस्थाओं की नियमित रिपोर्ट भी प्रशासन को लेनी होगी तभी अभियान सफल हो सकेगा ।इसके अलावा दुकानदारों को भी ग्राहकों को मना करने की आदत डालनी होगी या फिर कागज के लिफाफे इस्तेमाल करने होंगे तभी लोग घर से सामान लेने के लिए बैग लेकर निकलेंगे ।
सब्जी मंडियों पर सख्ती से आधी पॉलिथीन समस्या खत्म होगी: ओ.पी. सिहाग
जननायक जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष एवं नगर निगम के पूर्व कार्यकारी अधिकारी ओ पी सिहाग ने कहा है कि शहर की विभिन्न सेक्टरों में लगने वाली दैनिक सब्जी मंडियों में यदि पॉलिथीन की बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगा दी जाए तो आधे से अधिक समस्या स्वतः समाप्त हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम क्षेत्र में प्रतिबंधित और निम्न गुणवत्ता की पॉलिथीन खुलेआम बिक रही है और अधिकांश उपयोग सब्जी व फल विक्रेताओं के माध्यम से हो रहा है।
सिहाग ने नगर निगम प्रशासन से दो सप्ताह का विशेष अभियान चलाकर मंडियों में सघन जांच, जब्ती और चालान की कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, कपड़े या जूट के सस्ते थैले उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, ताकि लोग पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपना सकें।


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