चिट्ठियों के खेल में फंसे दिल के मरीज: नोटिस के बाद पीपीपी कंपनी का जवाब, बकाया भुगतान पर अड़ा मामला
पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित हार्ट सेंटर में आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस हृदय उपचार को लेकर जारी विवाद में नया मोड़ आ गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी 72 घंटे के नोटिस की समयसीमा बीतने के बाद कंपनी की ओर से जवाब भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि यह जवाब निर्धारित समय के भीतर नहीं, बल्कि देर शाम समयसीमा समाप्त होने के बाद भेजा गया बताया जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कंपनी ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया है कि राज्य स्तर पर उसके कई करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसके चलते आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस इलाज जारी रखना आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा। कंपनी ने भुगतान लंबित रहने को सेवा प्रभावित होने का मुख्य कारण बताया है।
बकाया भुगतान बना विवाद की जड़
मेडिट्रिना कंपनी पंचकूला सहित हरियाणा के चार जिलों में पीपीपी मोड पर हार्ट सेंटर संचालित कर रही है। कंपनी का दावा है कि आयुष्मान और बीपीएल श्रेणी के मरीजों के इलाज के करोड़ों रुपये लंबे समय से लंबित हैं। पंचकूला सेंटर में लगभग 35 लाख रुपये की पेंडेंसी बताई जा रही है, जबकि चारों जिलों को मिलाकर कुल बकाया राशि कई करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।
कंपनी का यह भी कहना है कि पूर्व में किए गए समझौते और इम्पैनलमेंट की प्रक्रिया में संरचनात्मक विसंगतियां हैं। डायरेक्ट इम्पैनलमेंट न होने और संशोधित दरें लागू न किए जाने का मुद्दा भी कंपनी ने अपने पत्राचार में उठाया है।
72 घंटे का नोटिस और विभाग की चेतावनी
मामला सार्वजनिक होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कंपनी को लीगल नोटिस जारी कर 72 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया था कि आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल किसी भी पात्र मरीज को कैशलेस इलाज देने से इनकार नहीं कर सकते। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि इलाज में देरी या इनकार के कारण किसी मरीज की जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कंपनी और उसके अधिकारियों की होगी।
प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. आर.एस. चौहान ने पहले पुष्टि की थी कि निर्धारित समयसीमा तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। हालांकि अब विभागीय सूत्रों का कहना है कि समयसीमा बीतने के बाद कंपनी की ओर से लिखित जवाब भेजा गया है, जिसकी समीक्षा की जा रही है।
कैशलेस सुविधा बंद, मरीजों की बढ़ी चिंता
हार्ट सेंटर में आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस सुविधा फिलहाल स्थगित है। सेंटर परिसर में चस्पा नोटिस में भुगतान लंबित होने का हवाला दिया गया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि आपातकालीन मरीजों को लौटाया नहीं जाएगा, लेकिन उपचार के बाद भुगतान करना अनिवार्य होगा।
इस निर्णय का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है। पहले जहां हर महीने 80 से 100 आयुष्मान मरीजों का इलाज होता था, वहीं पिछले तीन महीनों में महज 28 मरीजों का ही उपचार हो पाया है। हृदय रोग जैसे गंभीर मामलों में देरी जीवन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती है।
मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
मामला हरियाणा मानवाधिकार आयोग में भी विचाराधीन है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और यह पूछा है कि नई एजेंसी नियुक्त होने या विवाद सुलझने तक मरीजों के उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था क्या है। अगली सुनवाई में विभाग को जवाब प्रस्तुत करना है।
आगे क्या?
फिलहाल विभाग कंपनी के जवाब की कानूनी और प्रशासनिक समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान योजना सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है और इसके तहत पात्र मरीजों को इलाज से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। वहीं कंपनी बकाया भुगतान स्पष्ट होने तक अपनी स्थिति पर कायम दिखाई दे रही है।
पत्रों और नोटिसों के इस आदान-प्रदान के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग और कंपनी के बीच समाधान निकल पाएगा, या फिर दिल के मरीजों को इस खींचतान की कीमत चुकानी पड़ेगी।



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