हार्ट के मरीजों के लिए पंचकूला में वेंटीलेटर पर आयुष्मान कार्ड, कार्ड को देख सकते मगर इलाज असंभव
हार्ट के मरीजों के लिए पंचकूला में आयुष्मान कार्ड बना सिर्फ शो पीस , देख तो सकते हैं पर इलाज नहीं करवा सकते !
हरियाणा की अघोषित राजधानी कहे जाने वाले शहर पंचकूला में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्डधारकों के साथ वरिष्ठ नागरिकों को 5 लाख रुपये का कैशलेस इलाज देने का प्रावधान दम तोड़ता नजर आ रहा है, सरकारी से लेकर बड़े निजी अस्पतालों तक, किसी भी संस्थान में आयुष्मान कार्ड के जरिए हार्ट ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। यह हाल तब है जब डीजे हेल्थ का दफ्तर भी इसी अस्पताल में है और इसी शहर में हरियाणा सरकार के लगभग सभी बड़े दफ्तर मौजूद हैं और तो और कई मंत्रियों के निवास भी इसी शहर में है इसके अलावा खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंचकूला में एक हफ्ते में दो से तीन बार मीटिंग करते हैं।
सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल में हृदय रोग उपचार के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं। संबंधित एजेंसी का दावा है कि आयुष्मान के तहत किए गए इलाज का भुगतान लंबे समय से लंबित है, जिसके चलते नए मरीजों को योजना के तहत भर्ती नहीं किया जा रहा। यदि यह दावा सही है तो यह सीधे तौर पर भुगतान तंत्र और राज्य स्तर की निगरानी पर सवाल खड़ा करता है।
निजी क्षेत्र की स्थिति भी अलग नहीं है। शहर के प्रमुख अस्पतालों अलकेमिस्ट अस्पताल, ओजस अस्पताल और पारस अस्पताल आयुष्मान योजना पर इंपैनल्ड तो है पर इनमें से किसी में भी हृदय रोग से संबंधित उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं किए जाने की भी बात सामने आई है। ऐसे में मरीजों को मोहाली या चंडीगढ़ का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आपात स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।
मामले को लेकर एक 77 वर्षीय महिला के परिजन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरियाणा स्वास्थ्य विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी है। शिकायत में कहा गया है कि योजना के तहत मुफ्त इलाज का प्रावधान होने के बावजूद अस्पताल में मौजूद निजी एजेंसी के कर्ताधर्ता सतीश ने भुगतान लंबित होने का हवाला देकर उपचार से इनकार कर दिया।
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी जिले में जीवनरक्षक उपचार योजना के तहत उपलब्ध नहीं है तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता है। आयुष्मान योजना के अंतर्गत लाखों कार्ड जारी किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भुगतान, एम्पैनलमेंट और मॉनिटरिंग तंत्र की पारदर्शिता पर अब सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर न तो स्थानीय प्रशासन की ओर से स्पष्ट बयान आया है और न ही राजनीतिक स्तर पर ठोस प्रतिक्रिया दिखी है। यदि स्थिति शीघ्र नहीं सुधरी तो पंचकूला में आयुष्मान कार्डधारकों के लिए यह योजना कागजी लाभ तक सिमट कर रह जाने का खतरा पैदा कर सकती है। इसको दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि पंचकूला में आयुष्मान योजना हार्ट मरीजों के लिए खुद वेंटिलेटर पर है
इस पूरे मामले को लेकर जब खबरी प्रशाद अखबार की टीम ने सरकारी अस्पताल में हार्ट सेंटर चलाने वाली निजी एजेंसी के कर्ताधर्ता सतीश से बात करने की कोशिश की तो कई बार घंटी जाने के बाद भी उनकी तरफ से फोन नहीं उठाया गया हर बार फोन काट दिया गया।
पंचकूला सिविल अस्पताल की तरफ से सिर्फ 20 लाख रुपए का बकाया पेंडिंग है । उनको कई बार इलाज करने के लिए हम लिख चुके हैं पर हरियाणा के दूसरे शहरों की पेमेंट पेंडिंग की वजह से पंचकूला में एजेंसी ने इलाज बंद कर रखा है । मरीज को परेशानी हो रही है।
डॉ विकास सिविल अस्पताल सेक्टर 6 , आयुष्मान योजना प्रमुख
पहले भी ऐसे मामला सामने आए थे । इनका पैसा पिछले दिनों बाकी था , मामला कुछ सेटल हुआ भी था , पर फिर इलाज रुक जाना गंभीर मामला है । यह सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है, इस सरकार में दिखावा ज्यादा है सच्चाई कम है ।
ओ.पी. सिहाग अध्यक्ष जननायक जनता पार्टी पंचकूला
पहले भी अनेकों मामले आयुष्मान कार्ड को लेकर सामने आते रहे हैं पर सरकार और उसके अधिकारी सिर्फ एक कान से सुनती है दूसरे काम से निकाल देती है । मामला गंभीर है सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ।
मनोज अग्रवाल नेता इंडियन नेशनल लोकदल पंचकूला



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