Kerala अब होगा ‘Keralam’: केंद्र सरकार ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी, संवैधानिक प्रक्रिया शुरू
केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए Kerala का आधिकारिक नाम बदलकर ‘Keralam’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के साथ अब इस परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह कदम राज्य विधानसभा की उस लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है, जिसमें मलयालम भाषा की मूल पहचान के अनुरूप राज्य का नाम दर्ज करने की अपील की गई थी।
विधानसभा के प्रस्ताव को मिली हरी झंडी
केरल विधानसभा ने वर्ष 2023 और 2024 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन करने का आग्रह किया था। इन प्रस्तावों को राज्य के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने पेश किया था।
प्रस्ताव में कहा गया था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम ‘Keralam’ है, जबकि संविधान की प्रथम अनुसूची में इसे ‘Kerala’ के रूप में दर्ज किया गया है। राज्य सरकार का तर्क है कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बावजूद आधिकारिक नाम अंग्रेज़ी रूप में बना रहा, जिसे अब स्थानीय भाषा के अनुरूप किया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 3 के तहत होगी प्रक्रिया
नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत की जा रही है, जो संसद को राज्यों के नाम, सीमाओं और क्षेत्रफल में बदलाव का अधिकार देता है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब राष्ट्रपति की सिफारिश प्राप्त की जाएगी, जिसके उपरांत संसद में विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। विधेयक पारित होने के बाद ही यह बदलाव औपचारिक रूप से लागू होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद केरल राज्य का गठन हुआ था। यही दिन ‘केरल पिरवी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मलयालम भाषी क्षेत्रों को एकजुट कर ‘संयुक्त केरल’ बनाने की मांग उठी थी।
राज्य सरकार का कहना है कि उस ऐतिहासिक और भाषाई पहचान को ध्यान में रखते हुए ‘Keralam’ नाम अधिक उपयुक्त और प्रामाणिक है।
राजनीतिक दलों का रुख
राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को व्यापक समर्थन मिला है। राज्य भाजपा अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पहल का समर्थन जताया था।
हालांकि, कुछ नेताओं ने नाम परिवर्तन के व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने अंग्रेज़ी में राज्य के निवासियों को संबोधित करने के संदर्भ में हल्के-फुल्के अंदाज़ में सवाल उठाया कि ‘Keralite’ या ‘Keralan’ जैसे शब्दों का भविष्य क्या होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नए नाम के अनुरूप अंग्रेज़ी शब्दावली तय करने के लिए सार्वजनिक प्रतियोगिता आयोजित की जा सकती है।
प्रशासनिक और कानूनी प्रभाव
नाम परिवर्तन के बाद सरकारी दस्तावेजों, आधिकारिक संचार, शैक्षणिक अभिलेखों और केंद्रीय अधिसूचनाओं में संशोधन करना होगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और नागरिकों के दैनिक जीवन या प्रशासनिक सेवाओं पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा।
इससे पहले भी देश में कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं, जिनमें स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दी गई है। ऐसे मामलों में आम तौर पर पासपोर्ट, आधार या अन्य व्यक्तिगत दस्तावेजों में किसी प्रकार का स्वतः परिवर्तन आवश्यक नहीं होता, जब तक कि व्यक्ति स्वयं संशोधन का अनुरोध न करे।
सांस्कृतिक पहचान का प्रश्न
राज्य सरकार के अनुसार, ‘Keralam’ नाम मलयालम भाषा और सांस्कृतिक विरासत से सीधा जुड़ा है। यह कदम केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि भाषाई और ऐतिहासिक अस्मिता को संवैधानिक मान्यता देने का प्रयास है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से क्षेत्रीय पहचान और भाषाई गौरव को बल मिलेगा, साथ ही यह संघीय ढांचे में राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को भी रेखांकित करेगा।
आगे की राह
अब राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त होने और संसद में विधेयक पारित होने के बाद ही यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू होगा। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि आवश्यक संवैधानिक औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएंगी।
यदि संसद से विधेयक पारित हो जाता है, तो ‘Kerala’ आधिकारिक रूप से ‘Keralam’ के नाम से जाना जाएगा—एक ऐसा परिवर्तन जो राज्य की भाषाई जड़ों और ऐतिहासिक मांग को संवैधानिक स्वीकृति देगा।




Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!